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कहा जाता है कि प्रशासनिक-तन्त्र के कामकाज में बहुत ज्यादा राजनीतिक हस्तक्षेप होता है। सुझाव के तौर पर कहा जाता है कि ज्यादा-से-ज्यादा स्वायत्त एजेंसियाँ बननी चाहिए - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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प्रश्न

कहा जाता है कि प्रशासनिक-तन्त्र के कामकाज में बहुत ज्यादा राजनीतिक हस्तक्षेप होता है। सुझाव के तौर पर कहा जाता है कि ज्यादा-से-ज्यादा स्वायत्त एजेंसियाँ बननी चाहिए जिन्हें मंत्रियों को जवाब न देना पड़े।
क्या आप मानते हैं कि इससे प्रशासन ज्यादा जन-हितैषी होगा?

एक पंक्ति में उत्तर

उत्तर

यह प्रशासन को अधिक लोगों के अनुकूल नहीं बनाएगा क्योंकि यह मनमाने ढंग से कार्य करेगा और इस प्रकार, नियंत्रण और संतुलन के बिना जवाबदेही खो देगा।

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कार्यपालिका कितने प्रकार की होती है ?
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अध्याय 4: कार्यपालिका - प्रश्नावली [पृष्ठ ९९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Political Science [Hindi] Class 11
अध्याय 4 कार्यपालिका
प्रश्नावली | Q 9. (क) | पृष्ठ ९९

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संसदीय कार्यपालिका का अर्थ होता है


निम्नलिखित को सुमेलित करें-

(क)  भारतीय विदेश सेवा जिसमें बहाली हो उसी प्रदेश में काम करती है।
(ख) प्रादेशिक लोक सेवा केंद्रीय सरकार के दफ्तरों में काम करती है जो या तो देश की राजधानी में होते हैं या देश में कहीं और।
(ग) अखिल भारतीय सेवाएँ जिस प्रदेश में भेजा जाए उसमें काम करती है, इसमें प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में भी भेजा जा सकता है।
(घ)  केंद्रीय सेवाएँ भारत के लिए विदेशों में कार्यरत।

संसदीय-व्यवस्था ने कार्यपालिका को नियन्त्रण में रखने के लिए विधायिका को बहुत-से अधिकार दिए हैं। कार्यपालिका को नियन्त्रित करना इतना जरूरी क्यों है? आप क्या सोचते हैं?


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क्या लोकतंत्र का अर्थ यह होता है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशासन पर पूर्ण नियन्त्रण हो?


नियुक्ति आधारित प्रशासन की जगह निर्वाचन आधारित प्रशासन होना चाहिए। इस विषय पर 200 शब्दों में एक लेख लिखें।


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