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प्रश्न
किसी चित्र के पात्रों के बीच होने वाले संवाद की कल्पना करो और सुनाओ।
लघु उत्तरीय
उत्तर
चित्र का वर्णन: एक हरी-भरी पहाड़ी पर दो दोस्त बैठे हैं। सूरज ढलने को है, आसमान नारंगी और गुलाबी रंगों से भर गया है। पास ही एक छोटा सा गाँव दिख रहा है, और सामने दूर तक फैले खेत लहराते नज़र आ रहे हैं। दोनों दोस्त – रोहन और अमन – घास पर बैठे चाय पी रहे हैं और जीवन की बात कर रहे हैं।
संवाद:
रोहन (चाय की चुस्की लेते हुए): | यार, ये नज़ारा देख! ऐसा लगता है कि पूरी दुनिया बस यही है-शांति, ताज़ी हवा, और ये खूबसूरत रंग। |
अमन (हल्की मुस्कान के साथ): | हाँ, कभी-कभी लगता है, अगर ज़िंदगी ऐसी ही होती, बिना किसी चिंता के, तो कितना अच्छा होता! |
रोहन: | लेकिन क्या बिना संघर्ष के ज़िंदगी मज़ेदार होगी? सोच, अगर हमें हर चीज़ बिना मेहनत के मिल जाए तो उसका कोई मोल ही नहीं रहेगा। |
अमन: | हाँ, शायद तू सही कह रहा है। लेकिन कभी-कभी थक भी जाते हैं न? बस, किसी शांत कोने में बैठकर कुछ पल जीने का मन करता है। |
रोहन: | वो पल अभी हमारे पास हैं! इस चाय की गर्मी, ये ठंडी हवा, और बचपन का दोस्त-इससे ज़्यादा क्या चाहिए? |
अमन (हंसते हुए): | सही कहा! बस यही पल जीने के लिए होते हैं। चल, आज चिंता छोड़कर बस इस शाम का मज़ा लेते हैं। |
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