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किसी दिन माँ के घर में न होने पर उनके अनुभव कहलवाएँ। - Marathi (Second Language) [मराठी (द्वितीय भाषा)]

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प्रश्न

किसी दिन माँ के घर में न होने पर उनके अनुभव कहलवाएँ।

विस्तार में उत्तर

उत्तर

माँ के बिना घर सूना-सूना लगता है। उनके बिना दिन की शुरुआत ही अधूरी लगती है। सुबह कोई प्यार से जगाने वाला नहीं होता, नाश्ता ठीक से तैयार नहीं होता, और घर की सारी चीज़ें बिखरी रहती हैं। माँ के बिना घर में अनुशासन की कमी महसूस होती है, और उनकी ममता भरी बातें बहुत याद आती हैं।

  • जब माँ घर में नहीं होती, तो सुबह उठने में देर हो जाती है। कोई प्यार से उठाने वाला नहीं होता और स्कूल या ऑफिस जाने की पूरी तैयारी मुश्किल लगती है। नाश्ता भी उतना स्वादिष्ट नहीं लगता, क्योंकि माँ का बनाया खाना ही सबसे अच्छा होता है।
  • दिनभर माँ की कमी महसूस होती है। घर में सफाई, समय पर भोजन, और छोटे-छोटे कामों में कठिनाई आती है। माँ के बिना हर चीज़ बिखरी-बिखरी लगती है, और घर का माहौल खाली-सा महसूस होता है।
  • माँ केवल घर के काम नहीं करतीं, बल्कि अपने प्यार और देखभाल से घर को संपूर्ण बनाती हैं। जब वे नहीं होतीं, तब एहसास होता है कि वे हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनका प्यार, ममता और देखभाल हमें हर पल उनकी याद दिलाते हैं।
  • जब माँ वापस आती हैं, तो पूरा घर फिर से जीवंत हो जाता है। उनकी हँसी, प्यार और देखभाल फिर से घर में खुशियाँ भर देती है। तब समझ में आता है कि माँ सिर्फ एक इंसान नहीं, बल्कि पूरे घर की जान होती हैं।
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अध्याय 1.3: काकी - पाठ्य प्रश्न [पृष्ठ ६]

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बालभारती Integrated 7 Standard Part 3 [Hindi Medium] Maharashtra State Board
अध्याय 1.3 काकी
पाठ्य प्रश्न | Q २. | पृष्ठ ६
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