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प्रश्न
कृषि तथा उद्योग के संदर्भ में सहयोग के विभिन्न कार्यों की आवश्यकता की चर्चा कीजिए।
उत्तर
सहयोग सहचारी सामाजिक प्रक्रिया है। इसमें व्यक्तियों या समूहों के व्यक्तिगत या सामूहिक लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु साथ मिलकर काम करना शामिल है। साथ ही इसमें व्यक्तियों को एकत्रित करने के लिए सहानुभूति, परानुभूति और योग्यता भी सम्मिलित है। यह व्यक्तियों की शारीरिक और मनो-सामाजिक (Psycho-social) आवश्यकताओं की पूर्ति करती है।
सरल समाजों में जहाँ अतिरिक्त उत्पादन संभव नहीं, वहाँ व्यक्तियों और समूहों के मध्य सहयोग की भावना विद्यमान थी। यद्यपि पूँजीवादी समाजों में सहयोग की भावना विद्यमान तो है तथापि अनेक बार इसे आरोपित किया जाता है। उदाहरण के लिए फैक्ट्री में काम करने वाले मज़दूर अपने प्रतिदिन के कार्य में सहयोग तो करते है, परंतु उनके संबंधों के हित किसी निश्चित संघर्ष से परिभाषित होगा। सहयोग की अवधारणा मनुष्यों के व्यवहारों से संबंधित निश्चित अनुमानों पर आश्रित है। दुर्खाइम के अनुसार, श्रम विभाजन की भूमिका जिसका अर्थ सहयोग है, संक्षिप्त रूप में समाज की निश्चित आवश्यकताओं की पूर्ति है।” कृषि प्रधान समाज में व्यक्ति एक दूसरे पर निर्भर हैं। साझा उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु सदस्य मिलकर कार्य करते हैं। गाँवों में व्यक्तियों का एक समूह जैसे कि लुहार कृषि कार्य के लिए औजार, उपकरणों इत्यादि की व्यवस्था करता है। अन्य समूह दुकानदार की तरह कार्य करते हैं और खाद, बीज और कीटनाशी की व्यवस्था करता है। व्यक्तियों का अन्य समूह खेतों में बीज बोने का कार्य करते हैं, फसल कटाई के अवसर पर फसलों को काटते हैं तथा अन्य क्रिया-कलाप भी करते हैं। कृषक उद्देश्यों की प्राप्ति अकेला नहीं कर सकता है। इसी प्रकार औद्योगिक संचालन के क्षेत्र में विशेषज्ञता की आवश्यकता है। साझा लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु मजदूर और प्रबंधन को एक दूसरे पर आरोपित किया जा सकता है।