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क्षारीय मृदा धातुओं के सामान्य अभिलक्षण एवं गुणों में आवर्तिता की विवेचना कीजिए। - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

क्षारीय मृदा धातुओं के सामान्य अभिलक्षण एवं गुणों में आवर्तिता की विवेचना कीजिए।

दीर्घउत्तर

उत्तर

वर्ग 2 के तत्व: क्षारीय मृदा धातुएँ (Elements of Group2: Alkaline Earth Metals) आवर्त सारणी के वर्ग 2 के तत्व हैं- बेरिलियम (Be), मैग्नीशियम (Mg), कैल्सियम (Ca), स्ट्रॉन्शियम (Sr), बेरियम (Ba) एवं रेडियम (Ra)। बेरिलियम के अतिरिक्त अन्य तत्व संयुक्त रूप से ‘मृदा धातुएँ’ कहलाती हैं। प्रथम तत्व बेरिलियम वर्ग के अन्य तत्वों से भिन्नता दर्शाता है एवं ऐलुमिनियम के साथ विकर्ण संबंध (diagonal relationship) दर्शाता है। वर्ग का अंतिम तत्व रेडियम रेडियोऐक्टिव प्रकृति का है। इन तत्वों को विशिष्ट नाम निम्नलिखित कारणों से दिया जाता है-

  • इन तत्वों के ऑक्साइड क्षार धातुओं के समान जल में घुलकर हाइड्रॉक्साइड अथवा क्षार बनाते हैं।
  • ‘मृदा’ नाम इन्हें इसलिए दिया गया; क्योंकि ऐलुमिना (Al2O3) जैसे पदार्थ ऊष्मा के प्रति अधिक स्थायी होते हैं। कैल्सियम, स्ट्रॉन्शियम तथा बेरियम के ऑक्साइड भी ऊष्मा के प्रति स्थायी होते हैं तथा अत्यधिक गर्म किए जाने पर भी अपघटित नहीं होते। ये धातु ऑक्साइड तथा धातुएँ भी क्षारीय मृदा कहलाती हैं।

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration):
इन तत्वों के संयोजकता-कोश के s-कक्षक में 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [उत्कृष्ट गैस] ns2 होता है। क्षार धातुओं के समान ही इनके यौगिक भी मुख्यत: आयनिक प्रकृति के होते हैं।

तत्त्व प्रतीक इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
बेरिलियम Be 1s2, 2s2
मैग्नीशियम Mg 1s2, 2s2 2p6, 3s2
कैल्सियम Ca 1s2, 2s2 2p6, 3s2 3p6, 4s2
स्ट्रॉन्शियम Sr 1s2, 2s2 2p6, 3s2 3p6 3d10, 4s2 4p6, 5s2
बेरियम Ba 1s2, 2s2 2p6, 3s2 3p6 3d10, 4s2 4p6 4d10, 5s2 5p6, 6s2 या [Xe] 6s2
रेडियम Ra [Rn]7s2

क्षारीय मृदा धातुओं के सामान्य अभिलक्षण तथा गुणों में आवर्तिता इनके भौतिक तथा रासायनिक गुणों से स्पष्ट होती है। इनकी विवेचना निम्नवत् है-

भौतिक गुण (Physical Properties):
क्षारीय मृदा धातु-परिवार के सदस्यों के महत्त्वपूर्ण भौतिक गुण सारणी-2 में सूचीबद्ध हैं। इनका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है-

  1. परमाण्वीय एवं आयनिक त्रिज्या (Atomic and ionic radii)-
    आवर्त सारणी के संगत आवर्ती में क्षार धातुओं की तुलना में क्षारीय मृदा धातुओं की परमाण्वीय एवं आयनिक त्रिज्याएँ छोटी होती हैं। ये वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती हैं। इसका कारण इन तत्वों के नाभिकीय आवेशों में वृद्धि होना
  2. आयनन एन्थैल्पी (lonisation enthalpies)-
    क्षारीय मृदा धातुओं के परमाणुओं के बड़े आकार के कारण इनकी आयनने एन्थैल्पी के मान न्यून होते हैं। चूँकि वर्ग में आकार ऊपर से नीचे क्रमश: बढ़ता जाता है; अत: इनकी आयनन एन्थैल्पी के मान कम होते जाते हैं जैसा कि सारणी-2 में स्पष्ट है। क्षारीय मृदा धातुओं के प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान क्षार धातुओं के प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मानों की तुलना में अधिक है। यह इनकी क्षार धातुओं की संगत तुलनात्मक रूप से छोटे आकार होने के कारण होती है, परंतु इनके द्वितीय आयनन एन्थैल्पी के मान क्षार धातुओं के द्वितीय आयनन एन्थैल्पी के मानों की तुलना में कम हैं।
    उदाहरणार्थ - Mg के प्रथम यिनन एन्थैल्पी को मान Na से अधिक है जिसका कारण Mg का छोटा आकार तथा सममित्ताकार इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है। परंतु एक इलेक्ट्रॉन खोकर Na+ आयन उत्कृष्ट गैस निऑन को विन्यास (1s2, 2s2 2p6) प्राप्त कर लेता है, जबकि Mg के संयोजकता कोश में अभी भी एक इलेक्ट्रॉन शेष रह जाता है (1s2, 2s2 2p6, 3s1)। सोडियम के द्वितीयक आयनन एन्थैलपी का उच्च मान इसके सममिताकार इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के कारण होता है।
  3.  जलयोजन एन्थैल्पी (Hydration enthalpy)-
    क्षार धातुओं के समान इसमें भी वर्ग में ऊपर से नीचे आयनिक आकार बढ़ने पर इनकी जलयोजन एन्थैल्पी के मान कम होते जाते हैं।
    Be2+ > Mg2+ > Ca2+ > Sr2+ > Ba2+
    क्षारीय मृदा धातुओं की जलयोजन एन्थैल्पी क्षार धातुओं की जलयोजन एन्थैल्पी की तुलना में अधिक होती है। इसीलिए मृदा धातुओं के यौगिक क्षार धातुओं के यौगिकों की तुलना में अधिक जलयोजित होते हैं। जैसे–MgCl2 एवं CaCl2 जलयोजित अवस्था MgCl2.6H2O एवं CaCl2.6H2O में पाए जाते हैं, जबकि NaCl एवं KCI ऐसे हाइड्रेट नहीं बनाते हैं।
  4. धात्विक गुण (Metallic character)-
    क्षारीय मृदा धातुएँ सामान्यतया चाँदी की भाँति सफेद, चमकदार एवं नर्म, परंतु अन्य धातुओं की तुलना में कठोर होती हैं। बेरिलियम तथा मैग्नीशियम लगभग धूसर रंग (greyish) के होते हैं। क्षारीय मृदा धातुओं में समान आवर्त में उपस्थित क्षार धातुओं की तुलना में प्रबल धात्विक बन्ध होते हैं।
    उदाहरणार्थ - मैग्नीशियम, सोडियम की तुलना में अधिक कठोर तथा सघन होता है।
  5. गलनांक तथा क्वथनांक: (Melting and boiling points)-
    इनके गलनांक एवं क्वथनांक क्षार धातुओं की तुलना में उच्च होते हैं; क्योंकि इनके आकार छोटे होने के कारण ये निविड संकुलित (closely packed) होते हैं तथा इनमें प्रबल धात्विक बंध होते हैं। फिर भी इनके गलनांकों तथा क्वथनांकों में कोई नियमित परिवर्तन नहीं दिखता है।
  6. धनविद्युती गुण (Electropositive character)-
    निम्न आयनन एन्थैल्पी के कारण क्षारीय मृदा धातुएँ प्रबल धनविद्युती होती हैं। धनविद्युती गुण ऊपर से नीचे Be से Ba तक बढ़ता है।
  7. ज्वाला को रंग प्रदान करना (Colouration to the flame)-
    कैल्सियम, स्ट्रॉन्शियमं एवं बेरियम ज्वाला को क्रमशः ईंट जैसा लाल (brick red) रंग, किरमिजी लाल (crimson red) एवं हरा (green) रंग प्रदान करते हैं। ज्वाला में उच्च ताप पर वाष्प-अवस्था में क्षारीय मृदा धातुओं के बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा-स्तर पर चले जाते हैं। ये उत्तेजित इलेक्ट्रॉन जब पुन: अपनी तलस्थ अवस्था में लौटते हैं, तब दृश्य प्रकाश के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित होती है। परिणामस्वरूप ज्वाला रंगीन दिखने लगती है। बेरिलियम तथा मैग्नीशियम के बाह्यतम कोशों के इलेक्ट्रॉन इतनी प्रबलता से बँधे रहते हैं कि ज्वाला की ऊर्जा द्वारा इनका उत्तेजित होना कठिन हो जाता है। अतः ज्वाला में इन धातुओं का अपना कोई अभिलाक्षणिक रंग नहीं होता है। गुणात्मक विश्लेषण में Ca, Sr एवं Ba मूलकों की पुष्टि ज्वाला-परीक्षण के आधार पर की जाती है तथा इनकी सांद्रता का निर्धारण ज्वाला प्रकाशमापी द्वारा किया जाता है। क्षारीय मृदा धातुओं की क्षार धातुओं की तरह विद्युत एवं ऊष्मीय चालकता उच्च होती है। यह इनका अभिलाक्षणिक गुण होता है।
    सारणी-2: क्षारीय मृदा धातुओं के परमाण्वीय एवं भौतिक गुण (Atomic and Physical Properties of the Alkaline Earth Metals)
    गुण

    बेरिलियम
    Be

    मैग्नीशियम
    Mg

    कैल्सियम
    Ca

    स्ट्रॉन्शियम
    Sr

    बेरियम
    Ba

    रेडियम
    Ra

    परमाणु क्रमांक 4 12 20 38 56 88
    परमाणु द्रव्यमान (g mol-1) 9.01 24.31 40.08 87.62 137.33 226.03
    इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [He]2s2 [Ne]3s2 [Ar]4s2 [Kr]5s2 [Xe]6s2 [Rn]7s2

    आयनन एन्थैल्पी (I)
    (kJ mol-1)

    899 737 590 549 503 509

    आयनन एन्थैल्पी (II)
    (kJ mol-1)

    1757 1450 1145 1064 965 979

    जलयोजन एन्थैल्पी
    (kJ mol-1)

    -2494 -1921 -1577 -1443 -1305 -
    धात्विक त्रिज्या (pm) 112 160 197 215 222 -
    आयनिक त्रिज्या M2+/(pm) 31 72 100 118 135 148
    गलनांक (K) 1560 924 1124 1062 1002 973
    क्वथनांक (K) 2745 1363 1767 1655 2078 (1973)
    घनत्व (g cm-3) 1.84 1.74 1.55 2.63 3.59 (5.5)
    मानक विभव EΘ[V/(M+/M)] के लिए -1.97 -2.36 -2.84 -2.92 -2.92 -2.92
    स्थलमंडल में प्राप्ति (ppm) 6 20,000 36300 300 250 ˜10-6
  8. विद्युत-ऋणात्मकता (Electronegativity)-
    क्षारीय मृदा धातुओं के विद्युत-ऋणात्मकता मान क्षार धातुओं के लगभग समान होते हैं (कुछ अधिक)। विद्युत-ऋणात्मकता मान बेरिलियम से रेडियम तक घटते हैं तथा आयनिक यौगिक बनाने की प्रवृत्ति में वृद्धि व्यक्त करते हैं। बेरिलियम का उच्च विद्युत ऋणात्मकता मान (1.5) प्रदर्शित करता है कि यह धातु आयनिक यौगिक बनाती है।

रासायनिक गुण (Chemical Properties)
क्षारीय मृदा धातुएँ क्षार धातुओं से कम क्रियाशील होती हैं। इन तत्वों की अभिक्रियाशीलता वर्ग में ऊपरे: से नीचे जाने पर बढ़ती है।

  1. वायु एवं जल के प्रति अभिक्रियाशीलता (Reactivity with air and water)-
    बेरिलियम एवं मैग्नीशियम गतिकीय रूप से ऑक्सीजन तथा जल के प्रति निष्क्रिय हैं; क्योंकि इन धातुओं के पृष्ठों (surfaces) पर ऑक्साइड की फिल्म जम जाती है। फिर भी, बेरिलियम चूर्ण रूप में वायु में जलने पर BeO एवं Be2N3 बना लेता है। मैग्नीशियम अधिक धनविद्युतीय है, जो वायु में अत्यधिक चमकीले प्रकाश के साथ जलते हुए MgO तथा Mg3N2 बना लेता है। कैल्सियम, स्ट्रॉन्शियम एवं बेरियम वायु से शीघ्र अभिक्रिया करके ऑक्साइड तथा नाइट्राइड बनाते हैं। ये जल से और भी अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करते हैं; यहाँ तक कि ठंडे जल से अभिक्रिया कर हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं।
  2.  हैलोजेन के प्रति अभिक्रियाशीलता (Reactivity with halogens)-
    सभी क्षारीय मृदा धातुएँ हैलोजेन के साथ उच्च ताप पर अभिक्रिया करके हैलाइड बना लेती हैं-
    \[\ce{M + X2 -> MX2}\] (X = F, CI, Br, I)
    BeF2 बनाने की सबसे सरल विधि (NH4)2BeF4 का तापीय अपघटन है, जबकि BeCl2, ऑक्साइड से सरलतापूर्वक बनाया जा सकता है।
    \[\ce{BeO  + C +Cl2 <=>[600-800K] BeCl2 + CO\uparrow}\]
    इन धातुओं के ऑक्साइडों, हाइड्रॉक्साइडों तथा कार्बोनेटों पर हैलोजेन अम्लों (HX) की प्रतिक्रिया द्वारा भी हैलाइड बनाए जा सकते हैं।
    \[\ce{M + 2HX -> MX2 + H2}\]
    \[\ce{MO + 2HX -> MX2 + H2O}\]
    \[\ce{M(OH)2 + 2HX -> MX2 + 2H2O}\]
    \[\ce{MCO3 + 2HX -> MX2 + H2O + CO2}\]
  3. हाइड्रोजन के प्रति अभिक्रियाशीलता (Reactivity with dihydrogen)-
    बेरिलियम के अतिरिक्त सभी क्षारीय मृदा धातुएँ गर्म करने पर डाइहाइड्रोजन से अभिक्रिया करके हाइड्राइड बनाती हैं।
    \[\ce{M + H2 ->[\triangle]\underset{\text{धातु हाइड्राइड}}{MH2}}\]
    BeH2 को BeCl2 एवं LiAlH4 की अभिक्रिया से बनाया जा सकता है
    \[\ce{2BeCl2 + LiAlH4 -> 2BeH2 + LiCl + AlCl3}\]
    BeH2 तथा MgH2 प्रवृत्ति में सहसंयोजी होते हैं, जबकि अन्य धातुओं के हाइड्राइडों की आयनिक संरचना होती है। आयनिक हाइड्राइड; जैसे —CaH2 (यह हाइड्रोलिथ भी कहलाता है।) जल से क्रिया करके डाइहाइड्रोजन गैस मुक्त करता है।
    \[\ce{\underset{\text{हाइड्रोलिथ}}{CaH2} + 2H2O -> Ca(OH)2 + 2H2\uparrow} \]
  4. अम्लों के प्रति अभिक्रियाशीलता (Reactivity with acids)-
    क्षारीय मृदा धातुएँ शीघ्र ही अम्लों से अभिक्रिया कर डाइहाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं।
    \[\ce{M + 2HCl -> MCl2 +H2\uparrow}\]
  5. अपचायक प्रकृति (Reducing nature)-
    प्रथम वर्ग की धातुओं के समान क्षारीय मृदा धातुएँ प्रबल अपचायक हैं। इसका बोध इनके अधिक ऋणात्मक अपचयन विभव के मानों से होता है। यद्यपि इनकी अपचयन-क्षमता क्षार धातुओं की तुलना में कम होती है। बेरिलियम के अपचयन विभव का मान अन्य क्षारीय मृदा धातुओं से कम ऋणात्मक होता है फिर भी इसकी अपचयन-क्षमता का कारण Be2+ आयन के छोटे आकार, इसकी उच्च जलयोजन ऊर्जा एवं धातु की उच्चं परमाण्वीयकरण एन्थैल्पी का होना है।
  6. द्रव अमोनिया में विलयन (Solution in liquid ammonia)-
    क्षार धातुओं की भाँति क्षारीय मृदा धातुएँ भी द्रव अमोनिया में विलेय होकर गहरे नीले-काले रंग का विलयन बना लेती हैं। इस विलयन से धातुओं के अमोनीकृत आयन प्राप्त होते हैं-
    \[\ce{M + (x + y)NH3 -> [M(NH3)_{{x}}]^2 + 2[e(NH3)_{{y}}]-}\]
    इन विलयनों से पुन: अमोनिएट्स (ammoniates) [M(NH3)6]2+ प्राप्त किए जा सकते हैं।
  7. कार्बोनेटों का बनना (Formation of carbonates)-
    धातु के हाइड्रॉक्साइडों के जलीय विलयनों में CO2 की वाष्प की सीमित मात्रा प्रवाहित करने पर धातुओं के कार्बोनेट सफेद अवक्षेप के रूप में प्राप्त किए जा सकते हैं।
    \[\ce{M(OH)2(aq) + \underset{\text{सिमित}}{CO2(g)} -> \underset{\text{सफ़ेद अवक्षेप}}{MCO3(s)} + H2O(l)}\]
    \[\ce{Ca(OH)2(aq) + CO2(g) -> CaCO3(s) + H2O(l)}\]
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क्षारीय मृदा धातुओं के यौगिकों के सामान्य अभिलक्षण
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अध्याय 10: s-ब्लॉक तत्त्व - अभ्यास [पृष्ठ ३१२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Chemistry - Part 1 and 2 [Hindi] Class 11
अध्याय 10 s-ब्लॉक तत्त्व
अभ्यास | Q 10.2 | पृष्ठ ३१२
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