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प्रश्न
कुछ मार्मिक प्रसंगों के आधार पर यह दिखाई देता है कि बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे। पाठ के आधार पर उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
इकलौते पुत्र की मृत्यु के मार्मिक अवसर को वह आत्मा-परमात्मा के मिलन का, आनंदित होने का अवसर बताते हैं। वह इस प्रचलित मान्यता को ठुकरा देते हैं कि केवल पुरुष ही चिता में आग लगाने का अधिकारी है। वह पुत्रवधू से पुत्र की चिता को आग दिलवाते हैं। वह विधवा पतोहू को उसके भाई के साथ भेजकर उसका पुनर्विवाह करने का आदेश देते हैं। समाज में विधवा-विवाह पर रोक की वह चिन्ता नहीं करते।
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