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प्रश्न
कुछ विशेष प्रकार के ईथरों को विलियम्सन संश्लेषण द्वारा बनाने की सीमाओं को उदाहरणों से समझाइए।
उत्तर
विलियम्सन ईथर संश्लेषण की मुख्य सीमा यह है कि इसका उपयोग उन विषमचतुर्भुज (unsymmetrical) ईथरों की तैयारी के लिए नहीं किया जा सकता है, जिनमें यौगिक में तृतीयक या द्वितीयक ऐल्किल समूह होते हैं। उदाहरण के लिए, तृतीयक-ब्यूटिल ब्रोमाइड और सोडियम मेथॉक्साइड के बीच की अभिक्रिया एक अल्कीन उत्पन्न करती है।
\[\begin{array}{cc}
\ce{CH3}\phantom{...........................}\ce{CH2}\phantom{.........}\\
\phantom{.}|\phantom{..............................}||\phantom{............}\\
\ce{CH3 - C - Br + NaOCH3 -> CH3 - C + NaBr + CH3OH}\\
|\phantom{..............................}|\phantom{............}\\
\ce{\underset{{तृतीयक-ब्यूटिल ब्रोमाइड}}{CH3}\phantom{.............}\ce{\underset{{2-मेथिलप्रोपीन}}{CH3}}}\phantom{........}\
\end{array}\]
यह ऐल्कीन के निर्माण और SN2 पर प्रतिस्पर्धी उन्मूलन (elimination) अभिक्रिया के प्रभुत्व के कारण होता है।
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(i) | (ii) |
निम्नलिखित को उदाहरण सहित समझाइए।
विलियम्सन ईथर संश्लेषण
निम्नलिखित ईथर को विलियम्सन संश्लेषण द्वारा बनाने के लिए अभिकर्मक का नाम एवं समीकरण लिखिए –
1-प्रोपॉक्सीप्रोपेन
निम्नलिखित ईथर को विलियम्सन संश्लेषण द्वारा बनाने के लिए अभिकर्मक का नाम एवं समीकरण लिखिए –
एथॉक्सीबेन्जीन
निम्नलिखित ईथर को विलियम्सन संश्लेषण द्वारा बनाने के लिए अभिकर्मक का नाम एवं समीकरण लिखिए –
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निम्नलिखित ईथर को विलियम्सन संश्लेषण द्वारा बनाने के लिए अभिकर्मक का नाम एवं समीकरण लिखिए –
1-मेथॉक्सीएथेन
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