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‘क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?’ कवि का मानना है कि समय बीत जाने पर भी उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है। क्या आप ऐसा मानते हैं? तर्क सहित लिखिए। - Hindi Course - A

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प्रश्न

‘क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?’ कवि का मानना है कि समय बीत जाने पर भी उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है। क्या आप ऐसा मानते हैं? तर्क सहित लिखिए।

एक पंक्ति में उत्तर

उत्तर

कवि भले ही ऐसा मानता हो कि समय बीत जाने पर उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है परंतु समय पर मिलने वाली उपलब्धि का आनंद कुछ और ही होता है। यदि परिश्रम के तुरंत बाद सफलता और दिनभर के परिश्रम के बाद मजदूरी नहीं मिलती है तो मन में निराशा जन्मती है। इसके विपरीत समय पर मिलने वाली सफलता से मन उत्साहित होता है। इससे भविष्य के प्रति आशावादी दृष्टिकोण विकसित होता है।

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छाया मत छूना
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अध्याय 7: गिरिजाकुमार माथुर - छाया मत छूना - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ४७]

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एनसीईआरटी Hindi - Kshitij Part 2 Class 10
अध्याय 7 गिरिजाकुमार माथुर - छाया मत छूना
प्रश्न-अभ्यास | Q 9 | पृष्ठ ४७

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