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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) ९ वीं कक्षा

‘क्या सचमुच आजाद हुए हम’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। - Hindi [हिंदी]

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प्रश्न

‘क्या सचमुच आजाद हुए हम’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आजादी पाने के बाद से हर साल इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। स्कूल, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों तथा अन्यत्र सभी जगहों पर आजादी का जश्न मनाया जाता है। आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश में कई वर्ग ऐसे हैं जिन्हें आज भी अपनी आजादी का इंतजार है। देश में बढ़ता भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, भुखमरी, कुपोषण तथा गरीबी के कारण आजादी शब्द के मायने खत्म होते जा रहे हैं। जहाँ की जनता अपने लिए भर पेट भोजन जुटाने के काबिल भी नहीं वहाँ आजादी की बातें भी बंधन में जकड़ती महसूस होती हैं। आज भी उन्हें इंतजार है उस आजादी का, जो एक औरत को उसकी सही पहचान दिलाने में मदद करे, देश की आधी आबादी को इंतजार है उस आजादी का, जो उनकी प्रतिभा को पनपने के पूर्ण अवसर दें, देश की बहन-बेटियों को इंतजार है उस आजादी का, जहां वे बेखौफ रहकर अपने सम्मान की रक्षा कर पाएं। हमारे आजाद भारत में हमारे ही परिवार का महत्त्वपूर्ण हिस्सा आज भी लड़ रही हैं उस आजादी के लिए जो स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी उनसे दूर है। हमारे यहाँ उन्हें समानता का अधिकार देना तो दूर एक आम नागरिक होने तक का सम्मान प्राप्त नहीं है। इन अभावों के साथ कैसे कहें कि हम आजाद हैं। हमारा देश तभी आजाद होगा जब हर एक देशवासी आजादी महसूस करेगा। हम सबको मिलकर व्यवस्था को बदलने की एक प्रभावी पहल करनी होगी और इस सुधार की पहल पहले किसी एक से ही होगी। पहले किसी एक को ही अपनी जिम्मेदारी व कर्तव्य को समझना होगा तभी बाकी सभी लोग इस मुहिम में शामिल हो पाएंगे और तभी हम समझ पाएंगे आजादी के सही मायने क्या होते है। इस बदली व्यवस्था से ही मिलेगी हमारी आजादी, हमारी स्वाधीनता। कवि का यह शीर्षक, ‘क्या सचमुच आजाद हुए हम’ शतप्रतिशत सार्थक है।

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क्‍या सचमुच आजाद हुए हम ?
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अध्याय 1.13: क्‍या सचमुच आजाद हुए हम ? - स्वाध्याय [पृष्ठ ५४]

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बालभारती Hindi - Kumarbharati 9 Standard Maharashtra State Board
अध्याय 1.13 क्‍या सचमुच आजाद हुए हम ?
स्वाध्याय | Q (२) | पृष्ठ ५४
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