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प्रश्न
लेखक ने पाठ में गानपन का उल्लेख किया है। पाठ के संदर्भ में स्पष्ट करते हुए बताएँ कि आपके विचार में इसे प्राप्त करने के लिए किस प्रकार के अभ्यास की आवश्यकता है?
उत्तर
‘गानपन’ का शाब्दिक अर्थ है - वह गायकी जो एक आम इनसान को भी भाव-विभोर कर दे। वास्तव में, यह कला लता जी में है। गीत को गाने में मन की गहराइयों से भाव पिरोए जाएँ, यही उनका प्रयास रहता है। इस प्रयास में उन्हें काफ़ी हद तक सफलता भी मिली है। जिस प्रकार एक मनुष्य के लिए ‘मनुष्यता’ का होना जरूरी है, उसी प्रकार संगीत के लिए गानपन होना बहुत ज़रूरी है। लता जी की लोकप्रियता का मुख्य कारण यही गानपन है। यह गुण अपनी गायकी में लाने के लिए गायक को भरपूर रियाज़ करना चाहिए। साथ ही गीत के बोल, स्वरों के साथ-साथ भावों में भी पिरोए जाने चाहिए। गानों में गानपन के लिए स्वरों का उचित ज्ञान के साथ-साथ स्पष्टता व निर्मलता भी होनी चाहिए। स्वरों का जितना स्पष्ट व निर्मल उच्चारण होगा, संगीत उतना ही मधुर होगा। रसों के अनुसार उनकी लयात्मकता भी होनी चाहिए। स्वर, लय, ताल, उच्चारण आदि का सूक्ष्म ज्ञान प्राप्त कर उनको अपने संगीत में उतारने का प्रयास करना चाहिए।
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