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प्रश्न
"मानव पर्यावरण को प्रभावित करते हैं तथा उससे प्रभावित होते हैं"। इस कथन की व्याख्या उदाहरणों की सहायता से कीजिए।
उत्तर
पर्यावरण पर मानव प्रभाव - मनुष्य भी अपनी शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए और अन्य उद्देश्यो से भी प्राकृतिक पर्यावरण के ऊपर अपना प्रभाव डालते हैं। निर्मित पर्यावरण के सारे उदाहरण पर्यावरण के ऊपर मानव प्रभाव को अभिव्यक्त करते हैं। उदाहरण के लिए, मानव ने जिसे हम 'घर' कहते हैं, उसका निर्माण प्राकृतिक पर्यावरण को परिवर्तित करके ही किया जिससे की उन्हें एक आश्रय मिल सके। मनुष्यों के इस प्रकार के कुछ कार्य पर्यावरण को क्षति भी पहुँचा सकते हैं और अंततः स्वयं उन्हें भी अनेकानेक प्रकार से क्षति पहुँचा सकते हैं। उदाहरण के लिए, मनुष्य उपकरणों का उपयोग करते हैं, जैसे - रेफ्रीरजेटर तथा वातानुकूलन यंत्र जो रासायनिक द्रव्य उत्पादित करते हैं, जो वायु को प्रदूषित करते हैं तथा अंततः ऐसे शारीरिक रोगों के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं, जैसे - कैंसर के कुछ प्रकार। धूम्रपान के द्वारा हमारे आस - पास की आयु प्रदूषित होती है तथा प्लास्टिक एवं धातु से बानी वस्तुओं को जलाने से पर्यावरण पर घोर विपदकारी प्रदूषण फैलाने वाला प्रभाव होता है। वृक्षों के कटान या निर्वनीकरण के द्वारा कार्बन चक्र एवं जल चक्र में व्यवधान उत्पत्र हो सकता है। इससे अंततः उस क्षेत्र विशेष में वर्षा के संरूप पर प्रभाव पड़ सकती है और भू - क्षरण तथा परुस्थतिकरण में वृद्धि हो सकती है। वे उघोग जो निस्सारी का बही करते है तथा इस असंसाधित गंदे पानी को नदियों में प्रवाहित करते है, इस प्रदूषण के भयावह (शारीरिक) तथा मनोवैज्ञानिक परिणामों से तनिक भी चिंतित प्रतीत नहीं होते है।
मानव पर पर्यावरण के प्रभाव के तीन बिंदु है।
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प्रत्यक्षण पर पर्यावरणीय प्रभाव - पर्यावरण मानव के प्रत्यक्षण को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए अफ्रीका की एक जनजाति गोल झोपड़ियों में रहती है जिसमें कोणीय दीवारें नहीं होती है। ऐसा एक ज्यामितीय भ्रम के कारण किया जाता है। शहरों में रहने वाले लोगों के घरों में कोणीय दीवारें होती हैं।
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संवेंगों पर पर्यावरणीय प्रभाव - संवेग की दृष्टि से, भावनाओं की दृष्टि से पर्यावरण मनुष्य पर सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों तरह से प्रभाव डालता है। एक ताजा खिला हुआ फूल, किसी पर्वत की ऊंची शांत चोटी, कल-कल करती बहती हुई नदी, एक सुंदर बगीचा, उफान खाती लहरों वाला समुद्र आदि यह प्राकृतिक गतिविधियां मनुष्य के अंदर एक प्रफुल्लता एवं प्रसन्नता भर देती हैं । उसे शांति और सुकून का अनुभव होता है।
इसके विपरीत प्राकृतिक विपदायें जैसे कि भूकंप, बाढ़, आंधी, तूफान, बहुत ठंड, बहुत गरमी या बहुत बारिश आदि मनुष्य के अंदर एक तरह का अवसाद भर देती है, उसे दुख के सागर में डुबो देती हैं। मनुष्य के अंदर यह भाव उत्पन्न होता है कि उसके नियंत्रण में कुछ भी नहीं है।
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व्यवसाय, जीवनशैली तथा अभिवृत्तियों पर पारिस्थितिक प्रभाव - किसी क्षेत्र का प्राकृतिक पर्यावरण व उसकी संरचना क्षेत्र के निवासियों के जीवनयापन के स्वरूप को निर्धारित करती है कि उनकी आजीविका कैसी होगी। उदाहरण के लिए उपजाऊ मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोग कृषि व्यवसाय को अपनाते हैं । रेगिस्तान, वनों व पहाड़ों पर रहने वाले लोग शिकार, संग्रह आदि पर निर्भर होते हैं। जबकि उन क्षेत्रों में रहने वाले लोग जहां की भूमि उपजाऊ नहीं है उद्योगों पर आश्रित होते हैं। इस प्रकार मनुष्य के क्षेत्र के पर्यावरण की संरचना उसकी जीवन को प्रभावित करती है।"
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