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प्रश्न
‘मैंने देखा, एक बूँद’ कविता का प्रतिपाद्य लिखिए।
टिप्पणी लिखिए
उत्तर
‘मैंने देखा, एक बूँद’ कविता मनुष्य को क्षण का महत्व बताती है।
- मानव जीवन बेहद छोटा होता है वह एक पल के समान ही है। उसी में व्यक्ति बहुत कुछ करता है।
- कवि चाहता है कि मनुष्य अपने स्वयं के स्वार्थहित से हटाकर व्यष्टि का समष्टि में विलय कर देना चाहिए।
- इस संसार में विद्यमान प्रत्येक व्यक्ति दुखी है अतः हमें मिलकर लोगों के दुखों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।
- जिस तरह एक बूँद सागर से अलग होकर क्षण भर में सूर्य के प्रकाश से चमक उठती है। यह हमें सीख देती है कि इसविशाल संसार में मनुष्य अपने नश्वर शरीर के साथ भी स्वयं के छोटे-से जीवन को सार्थक कर सकता है।
- यह क्षण ही तो है, जो उसे स्वयं को सार्थक करने के लिए अवसर प्रदान करता है तथा इसी क्षण के कारण वह समुद्र रूपी संसार में बुँद के समान होते हुए भी सूर्य की चमक से स्वयं को चमका जाता है। उसकी क्षण भर कीचमक लोगों को प्रेरित करती है।
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मैंने देखा, एक बूँद
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