Advertisements
Advertisements
प्रश्न
मैंने समझा बसंती हवा कविता से
लघु उत्तरीय
उत्तर
बसंती हवा बड़ी ही बेफिक्र, निडर, बावली और मस्तमौला है। वह एक फक्कड़ मुसाफिर की तरह कभी इस पेड़ से उस पेड़ तो कभी खेतों में अटखेलियाँ करती फिरती है।
shaalaa.com
पद्य (6th Standard)
क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
गिरी ______ से फिर, चढ़ी आम ऊपर।
हिलाया-झुलाया गिरी पर न ______।
कविता की पंक्तियॉं पूरी करो।
चाॅंद सितारे ____________,
____________।
____________,
____________ आँगनिया।
कविता की पंक्तियॉं पूरी करो।
मेरा सुख ____________,
____________!
____________,
____________ गाऊँ मैं।
मैंने समझा सोई मेरी छौना रे कविता से
मैंने समझा तूफानों से क्या डरना कविता से
पंचमाक्षर (ङ, ञ, ण, न, म) के अनुसार पतंगों में उचित शब्दों की जोड़ियॉं मिलाओ।
इस कविता (तूफानों से क्या डरना) का सार लिखो।
मैंने समझा वह देश कौन-सा है? कविता से