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महालवारी व्यवस्था स्थायी बंदोबस्त के मुकाबले कैसे अलग थी? - Social Science (सामाजिक विज्ञान)

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प्रश्न

महालवारी व्यवस्था स्थायी बंदोबस्त के मुकाबले कैसे अलग थी?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

महालवारी व्यवस्था और स्थायी बंदोबस्त में भिन्नता –

महालवारी व्यवस्था-

बंगाल प्रेज़िडेंसी के उत्तर पश्चिमी के लिए होल्ट मैकेंजी नामक अंग्रेज़ ने एक नयी व्यवस्था 1822 में तैयार की गयी। इस व्यवस्था के अनुसार-

  1. गाँव के एक-एक खेत के अनुमानित राजस्व को जोड़कर हर गाँव या ग्राम संमूह (महाल) से वसूल होने वाले राजस्व का हिसाब लगाया गया।
  2. इस राजस्व को स्थायी रूप से निश्चित नहीं किया गया, बल्कि उसमें समय-समय पर संशोधन का प्रावधान किया गया।
  3. राजस्व इकट्ठा करने तथा कंपनी के पास जमा कराने का काम जमींदार के स्थान पर गाँव के मुखिया को दिया गया।

स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था-

लॉर्ड कॉर्नवॉलिस ने 1793 में यह व्यवस्था लागू की-

  1. राजाओं और तालुकदारों को जमींदारों के रूप में मान्यता दी गयी। खेत के हिसाब से राजस्व निश्चित नहीं किया गया।
  2. ज़मीनों की राजस्व राशि स्थायी रूप से निश्चित कर दी गयी। इस राशि में संशोधन का कोई प्रावधान नहीं किया गया।
  3. राजस्व इकट्ठा करने तथा कंपनी के पास जमा कराने का काम जमींदार को दिया गया। 
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कंपनी दीवान बन गई
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अध्याय 3: ग्रामीण क्षेत्र पर शासन चलाना - अभ्यास [पृष्ठ ३८]

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एनसीईआरटी History [Hindi] Class 8
अध्याय 3 ग्रामीण क्षेत्र पर शासन चलाना
अभ्यास | Q 4. | पृष्ठ ३८
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