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प्रश्न
मनोविज्ञान के विकास का संक्षिप्त रूप प्रस्तुत कीजिए |
उत्तर
मनोविज्ञान के विकास का इतिहास बहुत छोटा है | आधुनिक मनोविज्ञान का औपचारिक प्रारम्भ सन् 1879 में हुआ जब विलहम वुण्ट ने लिपजिंग जर्मनी में मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला को स्थापित किया |
एक अमेरिका मनोविज्ञानिक विलियम जेम्स जिन्होंने कैम्ब्रिज, मसाचुसेट्स में एक प्रयोगशाला की स्थापना लिपजिंग की प्रयोगशाला के कुछ ही समय पश्चात् की थी, ने मानव मन के अध्ययन के लिए प्रकार्यवादी (Functionalist) उपागम को विकसित किया | विलियम जेम्स का मानना था कि मन की संरचना पर ध्यान देने के बजाय मनोविज्ञान को इस बात का अध्ययन करना चाहिए की मन क्या करता है तथा व्यवहार लोगों को अपने वातावरण से निपटने के लिए किस प्रकार कार्य करता है | उदाहरण के लिए, प्रकार्यवादियों ने इस बात पर अधिक ध्यान केंद्रित किया कि व्यवहार लोगों को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने योग्य किस प्रकार बनाता है |
विलियम जेम्स के अनुसार वातावरण से अंत:क्रिया करने वाली मानसिक प्रक्रियाओं की एक सत्त धारा के रूप में चेतना ही मनोविज्ञान का मूल स्वरूप रूपायित करती है | उस समय के एक प्रसिद्ध शैक्षिक विचारक जॉन डीवी ने प्रकार्यवाद का उपयोग यह तर्क करने के लिए किया कि मानव किस प्रकार वातावरण के साथ अनुकूलन स्थापित करते हुए प्रभावोत्पादक ढंग से कार्य करता है |
बीसवीं सदी के प्रारंभ में, एक नवीन विचारधारा जर्मनी में गेस्टाल्ट मनोविज्ञान (Gestalt psychology) के रूप में वुण्ट के सरंचनावाद (Structuralism) के विरुद्ध आई | इसमें प्रत्यक्षिक अनुभवों के संगठन को महत्त्वपूर्ण माना गया | मन के अवयवों पर ध्यान न देकर गेस्टाल्टवादियों ने यह तर्क दिया कि जब हम दुनिया को देखते हैं तो हमारा प्रात्यक्षिक अनुभव प्रत्यक्षण के अवयवों के समस्त योग से अधिक होता है | दूसरे शब्दों में, हम जो अनुभव करते हैं वह वातावरण से प्राप्त आगतों से अधिक होता है | उदाहरण के लिए, जब अनेक चमकते बल्बों से प्रकाश हमारे दृष्टिपटल पर पड़ता है तो हम प्रकाश की गति का अनुभव करते हैं | जब हम कोई चलचित्र देखते हैं तो हम स्थिर चित्रों को तेज गति से चलती प्रतिमाओं को आपने दृष्टिपटल पर देखते हैं | इसलिए, हमारा प्रात्याक्षिक अनुभव अपने अवयवों से अधिक होता है | अनुभव समग्रतावादी होता है - यह एक गेस्टाल्ट होता है |
संरचनावाद की प्रतिक्रियास्वरूप एक और धारा व्यवहारवाद (Behaviowisim) के रूप में सामने आई | सन् 1910 के आसपास जॉन वाट्सन ने मन एवं चेतना के विचार को मनोविज्ञान के केंद्रीय विषय के रूप में अस्वीकार कर दिया | वे दैहिकशास्त्री इवान पावलव के प्राचीन अनुबंधन वाले कार्य से बहुत प्रभावित थे | उनके लिए मन प्रेक्षणीय नहीं है और अंतर्निरीक्षण व्यक्तिपरक है क्योंकि उसका सत्यापन एक अन्य प्रेक्षक द्वारा नहीं किया जा सकता है | उनके अनुसार एक विज्ञान के रूप में मनोविज्ञान क्या प्रेक्षणीय तथा सत्यापन करने योग्य है, इसी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए | उन्होंने मनोविज्ञान को व्यवहार के अध्ययन अथवा अनुक्रियाओं (उद्दीपकों) जिनका मापन किया जा सकता है तथा वस्तुपरक ढंग से अध्ययन किया जा सकता है, के रूप में परिभाषित किया |