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प्रश्न
मोहन जो-दड़ो की सभ्यता और संस्कृति का सामान भले अजायबघरों की शोभा बढ़ा रहा हो, शहर जहाँ था अब भी वहीं है, कैसे? "अतीत में दबे पाँव" के आधार पर समझाइए।
लघु उत्तरीय
उत्तर
मोहनजोदड़ो के अजायबघर में सिंधु सभ्यता से जुड़े पुरातात्विक अवशेष संग्रहित हैं। यहाँ काला पड़ चुका गेहूँ, ताँबे और काँसे के बर्तन, मुहरें, वाद्य यंत्र, चाक पर बने विशाल मृद्भांड, चौपड़ की गोटियाँ, लकड़ी की बैलगाड़ी, पत्थर के औज़ार और मिट्टी के कंगन जैसे अद्भुत वस्त्र देखे जा सकते हैं।
हालाँकि, यह शहर आज भी वहीं स्थित है। इसकी किसी दीवार पर पीठ टिकाकर आराम किया जा सकता है। चाहे वह खंडहर ही क्यों न हो, किसी घर की देहरी पर पाँव रखते ही एक अजीब-सी अनुभूति होती है। रसोई की खिड़की पर खड़े होकर ऐसा लगता है मानो उसकी पुरानी गंध को महसूस किया जा सकता है।
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