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प्रश्न
मूत्रण की व्याख्या कीजिए।
संक्षेप में उत्तर
उत्तर
- मूत्रत्याग वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा मूत्राशय से मूत्र उत्सर्जित होता है। जैसे-जैसे मूत्र जमा होता है, मूत्राशय की मांसपेशियों की दीवारें फैलती हैं।
- मृत्रण मूत्र वृक्क में बनकर मूत्राशय में एकत्र होता रहता है। सामान्यतः अन्त:मूत्रीय तथा बाह्यमूत्रीय संकोचक पेशियों के संकुचन के कारण मूत्रमार्ग बन्द रहता है। मूत्राशय से मूत्र त्याग तभी होता है जब मूत्रमार्ग की दोनों प्रकार की संकोचक पेशियाँ शिथिल हो जाएँ।
- अन्त:मूत्रीय संकोचक में अरेखित पेशी तथा बाह्य मूत्रीय संकोचक में रेखित पेशी तन्तु होते हैं, इसलिए अन्त:मूत्रीय संकोचक का शिथिलन स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र के नियन्त्रण में होने वाली अनैच्छिक और बाह्य मूत्रीय पेशियों का शिथिलन एक ऐच्छिक प्रतिक्रिया होती है।
- मूत्रण वास्तव में अनैच्छिक तथा ऐच्छिक प्रतिक्रियाओं के सहप्रभाव से होता है। ऐच्छिक नियन्त्रण के कारण हम इच्छानुसार मूत्र त्याग करते हैं।इससे मूत्राशय से मूत्र बाहर निकल जाता है। एक वयस्क मनुष्य प्रतिदिन लगभग 1 - 1.5 लीटर मूत्र उत्सर्जित करता है।
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मूत्रण
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अध्याय 16: उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन - अभ्यास [पृष्ठ २१५]