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प्रश्न
नादिर से भी बढ़कर आपकी जिद्द है- कर्ज़न के संदर्भ में क्या आपको यह बात सही लगती है? पक्ष या विपक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर
विपक्ष: नादिरशाह ने जब दिल्ली में आक्रमण किया, तो उसने 2 करोड़ रुपयों की माँग की थी। बाद में उसकी माँग 20 करोड़ रुपयों पर आ गई। दिल्ली शासन उस माँग को देने में असमर्थ था। नादिरशाह ने अपने सैनिकों को लूटपाट करने की छूट दे दी । कई लाखों जाने गई । उसे रोकने की तब किसी में भी हिम्मत न थी । ऐसे में नादिरशाह की तलवार को अपने गले में रखकर एक व्यक्ति ने प्रार्थना की थी। इस तरह से दोनों में समानता थी । दोनों ने किसी की परवाह नहीं की बस अपनी जिद्द को प्रमुख रखा। उनके लिए लोगों के दर्द से कोई सरोकार नहीं था। वे बस अपनी मर्जी को महत्व देते थे।
पक्ष: नादिरशाह की कहानी से पता चलता है कि नादिरशाह और कर्ज़न में समानता नहीं है। कर्ज़न ने भी भारत को लूटा मगर खून-खराबा नहीं किया। उसने चुपचाप बंगाल का विभाजन कर दिया।लेखक ने कर्ज़न की तुलना नादिरशाह से करके उचित नहीं किया है। यह अवश्य है कि भारत का विभाजन करके उसने गलत किया मगर नादिरशाह की तुलना में वह बहुत बुरा नहीं था। उसमें बंग विभाजन का आरोप लगाया जा सकता है मगर नादिरशाह से तुलना नहीं की जा सकती।
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