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नीचे कुछ विकल्प दिए जा रहे हैं। बताएँ कि इसमें किसका इस्तेमाल निम्नलिखित कथन को पूरा करने में नहीं किया जा सकता? लोकतांत्रिक देश को संविधान की जरूरत । - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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प्रश्न

नीचे कुछ विकल्प दिए जा रहे हैं। बताएँ कि इसमें किसका इस्तेमाल निम्नलिखित कथन को पूरा करने में नहीं किया जा सकता?

लोकतांत्रिक देश को संविधान की जरूरत ______।

विकल्प

  • सरकार की शक्तियों पर अंकुश रखने के लिए होती है।

  • अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों से सुरक्षा देने के लिए होती है।

  • औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता अर्जित करने के लिए होती है।

  • यह सुनिश्चित करने के लिए होती है कि क्षणिक आवेग में दूरगामी लक्ष्यों में कहीं विचलित न हो जाएँ।

  • शांतिपूर्ण ढंग से सामाजिक बदलाव लाने के लिए होती है।

MCQ

उत्तर

औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता अर्जित करने के लिए लिए होती है।

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संविधान के दर्शन का क्या आशय है ?
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 10: संविधान का राजनीतिक दर्शन - प्रश्नावली [पृष्ठ २३९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Political Science [Hindi] Class 11
अध्याय 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन
प्रश्नावली | Q 2. | पृष्ठ २३९

संबंधित प्रश्न

नीचे कुछ कानून दिए गए हैं। क्या इनका संबंध किसी मूल्य से है? यदि हाँ, तो वह अन्तर्निहित मूल्य क्या है? कारण बताएँ।

  1. पुत्र और पुत्री दोनों का परिवार की संपत्ति में हिस्सा होगा।
  2. अलग-अलग उपभोक्ता वस्तुओं के ब्रिकी-कर का सीमांकन अलग-अलग होगा।
  3. किसी भी सरकारी विद्यालय में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी।
  4. ‘बेगार’ अथवा बँधुआ मजदूरी नहीं कराई जा सकती।

संविधान सभा की बहसों को पढ़ने और समझने के बारे में नीचे कुछ कथन दिए गए हैं-

  1. इनमें से कौन-सा कथन इस बात की दलील है कि संविधान सभा की बहसें आज भी प्रासंगिक हैं? कौन-सा कथन यह तर्क प्रस्तुत करता है कि ये बहसें प्रासंगिक नहीं है?
  2. इनमें से किस पक्ष का आप समर्थन करेंगे और क्यों?
  1. आम जनता अपनी जीविका कमाने और जीवन की विभिन्न परेशानियों के निपटारे में व्यस्त होती है। आम जनता इन बहसों की कानूनी भाषा को नहीं समझ सकती।
  2. आज की स्थितियाँ और चुनौतियाँ संविधान बनाने के वक्त की चुनौतियों और स्थितियों से अलग हैं। संविधान निर्माताओं के विचारों को पढ़ना और अपने नए जमाने में इस्तेमाल करना दरअसल अतीत को वर्तमान में खींच लाना है।
  3. संसार और मौजूदा चुनौतियों को समझने की हमारी दृष्टि पूर्णतया नहीं बदली है।
    संविधान सभा की बहसों से हमें यह समझने के तर्क मिल सकते हैं कि कुछ संवैधानिक व्यवहार क्यों महत्त्वपूर्ण हैं। एक ऐसे समय में जब संवैधानिक व्यवहारों को चुनौती दी जा रही है, इन तर्को को न जानना संवैधानिक-व्यवहारों में सभा में हुई। वार्ता की आज भी उपयोगिता है।

निम्नलिखित कथनों को सुमेलित करें-

(क)  विधवाओं के साथ किए जाने वाले बरताव की आलोचना की आजादी आधारभूत महत्त्व की उपलब्धि
(ख)  संविधान-सभा में फैसलों का स्वार्थ के आधार पर नहीं बल्कि तर्कबुद्धि के आधार पर लिया जाना। प्रक्रियागत उपलब्धि
(ग)  व्यक्ति के जीवन में समुदाय के महत्त्व को स्वीकार करना। लैंगिक-न्याय की उपेक्षा
(घ) अनुच्छेद 371 उदारवादी व्यक्तिवाद
(ङ) महिलाओं और बच्चों को परिवार की संपत्ति में असमान अधिकार।  धर्म-विशेष की जरूरतों के प्रति ध्यान देना।

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