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प्रश्न
निम्नलिखित अभिक्रिया क्यों होती है?
\[\ce{XeO^{4-}_6(aq) + 2F^-(aq) + 6H^+(aq) -> XeO3(g) + F2(g) + 3H2O(l)}\]
यौगिक Na4XeO6 (जिसका एक भाग \[\ce{XeO^{4-}_6}\] है) के बारे में आप इस अभिक्रिया में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
उत्तर
\[\ce{Xe\overset{+8}{O}^4-_4(aq) + 2\overset{-1}{F^-}(aq) + 6H^+(aq) -> Xe\overset{+6}{O3}(s) + \overset{0}{F}_2(g) + 3H2O(l)}\]
इस अभिक्रिया में XeO6 को XeO3 में अपचयन तथा F– का F2 में ऑक्सीकरण हो रहा है। यह अभिक्रिया इसलिए संपन्न होती है क्योंकि XeO6, F2 से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है। चूँकि \[\ce{XeO^{4-}_6}\], F2 की तुलना में अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है, अत: Na4XeO6 एक प्रबल ऑक्सीकारक होगा।
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अपनी अभिक्रियाओं में सल्फर डाइऑक्साइड तथा हाइड्रोजन परॉक्साइड ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों ही रूपों में क्रिया करते हैं, जबकि ओजोन तथा नाइट्रिक अम्ल केवल ऑक्सीकारक के रूप में ही। क्यों?
इन अभिक्रिया को देखिए -
\[\ce{6CO2(g) + 6H2O(l) -> C6H12O6(aq) + 6O2(g)}\]
बताइए कि इन्हें निम्नलिखित ढंग से लिखना ज्यादा उचित क्यों है?
\[\ce{6CO2(g) + 12H2O(l) -> C6H12O6(aq) + 6H2O(l) + 6O2(g)}\]
उपर्युक्त अपचयोपचय अभिक्रिया के अन्वेषण की विधि सुझाइए।
इस अभिक्रिया को देखिए-
\[\ce{O3(g) + H2O2(l) -> H2O(l) + 2O2(g)}\]
बताइए कि इसे निम्नलिखित ढंग से लिखना ज्यादा उचित क्यों है?
\[\ce{O3(g) + H2O2(l) -> H2O(l) + O2(g) + O2(g)}\]
उपर्युक्त अपचयोपचय अभिक्रिया के अन्वेषण की विधि सुझाइए।
"जब भी एक ऑक्सीकारक तथा अपचायक के बीच अभिक्रिया संपन्न की जाती है, तब अपचायक के आधिक्य में निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक तथा ऑक्सीकारक के आधिक्य में उच्चतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक बनता है।" इस वक्तव्य का औचित्य तीन उदाहरण देकर दीजिए।
निम्नलिखित अभिक्रिया में ऑक्सीकृत, अपचयित, ऑक्सीकारक तथा अपचायक पदार्थ पहचानिए-
\[\ce{2AgBr(s) + C6H6O2(aq) -> 2Ag(s) + 2HBr(aq) + C6H4O2(aq)}\]
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में-
(क) \[\ce{H3PO2(aq) + 4AgNO3(aq) + 2H2O(l) -> H3PO4(aq) + 4Ag(s) +4HNO3(aq) }\]
(ख) \[\ce{H3PO2(aq) + 2CuSO4(aq) + 2H2O(l) -> H3PO4(aq) + 2Cu(s) + 2H2SO4(aq)}\]
(ग) \[\ce{C6H5CHO(l) + 2[Ag(NH3)2)]^+ (aq) + 3OH^-(aq) -> C6H5COO^-(aq) + 2Ag(s) + 4NH3(aq) + 2H2O(l)}\]
(घ) \[\ce{C6H5CHO(l) + 2Cu^2+(aq) + 5OH^-(aq)}\] कोई परिवर्तन नहीं।
इन अभिक्रियाओं से Ag+ तथा Cu2+ के व्यवहार के विषय में निष्कर्ष निकालिए।
आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया को संतुलित कीजिए-
\[\ce{MnO^-_4(aq) +SO2(g) -> Mn^2+(aq) + HSO^-_4(aq)}\] (अम्लीय माध्यम)