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प्रश्न
निम्नलिखित अपठित गदूयांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
"मनुष्य का मन पनचक्की के समान है। जब उसमें गेहूँ डालते जाओगे तब गेहूँ को पीसकर आटा बना देगी। परंतु जब उसमें गेहूँ न डालोगे तब वह स्वयं अपने-आपको पीसकर क्षीण बना डालेगी। जब यह निर्विवाद सिद्ध है कि काम न करना अथवा आलस्यपूर्ण जीवन बिता देना देह-धर्म के विरुद्ध है, तब हमारा यही कर्तव्य है कि हम कुछ-न- कुछ अच्छा व्यवसाय अपने लिए पसंद करें। यह व्यवसाय हमारे मन, इच्छा, कार्यशक्ति और स्वभाव के अनुकूल होना चाहिए। स्वाभाविक प्रकृति के प्रतिकूल व्यवसाय करने में सफलता कभी हो नहीं सकती। मनुष्य जीवन के असफल होने के दो मुख्य कारण हैं - पहला यह कि वह कभी-कभी अपनी स्वाभाविक कार्य-शक्ति के विरुदूध व्यवसाय में लग जाता है। दूसरा कारण यह है कि मनुष्य व्यवसाय-कुशल हुए बिना ही अपने कार्यों को शुरू कर देता है, परंतु जब तक कार्यकुशलता और कामचलाऊ अनुभव न हों जाए तब तक सहसा कोई काम शुरू न करना चाहिए। यह सच है कि अनुभव और कुशलता ज़ल्द नहीं आती, परंतु इन्हें दृष्टि के बाहर जाने नहीं देना चाहिए।'' |
- कृति पूर्ण कीजिए: (२)
- गद्यांश में से शब्द-युग्म दूँढ़कर लिखिए: (२)
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- 'व्यवसाय के लिए आवश्यक गुण' इस विषय पर ४० से ५० शब्दों में अपना मत लिखिए। (२)
उत्तर
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- कार्य - शक्ति
- देह - धर्म
- कभी - कभी
- अपने - आपको
- सफल व्यवसाय के लिए कुछ महत्वपूर्ण गुण आवश्यक होते हैं। सबसे पहले, व्यक्ति को अपने रुचि और स्वभाव के अनुकूल व्यवसाय चुनना चाहिए, क्योंकि मन से किया गया कार्य अधिक सफल होता है। कार्यकुशलता और अनुभव का होना आवश्यक है, जिससे कार्य में निपुणता आए। परिश्रम, धैर्य और आत्मविश्वास किसी भी व्यवसाय में सफलता दिलाने के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इसके अलावा, सृजनात्मकता और निर्णय लेने की क्षमता भी आवश्यक है ताकि कठिन परिस्थितियों का समाधान किया जा सके। व्यवसाय में निरंतर सीखने की इच्छा और ईमानदारी से किया गया कार्य ही व्यक्ति को उन्नति की ओर ले जाता है।