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प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
बाज़ार में एक जादू है। वह जादू आँख की राह काम करता है। वह रूप का जादू है पर जैसे चुंबक का जादू लोहे पर ही चलता है, वैसे ही इस जादू की भी मर्यादा है। जेब भरी हो, और मन खाली हो, ऐसी हालत में जादू का असर खूब होता है। जेब खाली पर मन भरा न हो, तो भी जादू चल जाएगा। मन खाली है तो बाजार की अनेकानेक चीजों का निमंत्रण उस तक पहुँच जाएगा। कहीं हुई, उस वक्त जेब भरी तब तो फिर वह मन किसकी मानने वाला है। मालूम होता है यह भी लूँ, वह भी लूँ । सभी सामान जरूरी और आराम को बढ़ाने वाला मालूम होता है। पर यह सब जादू का असर है। |
- बाजार को जादू क्यों कहा गया है? [1]
- आपूर्ति करने के कारण।
- भ्रम पैदा करने के कारण।
- बाज़ार की महिमा के कारण ।
- जरूरत पैदा करने के कारण।
- 'जादू की मर्यादा' से आप क्या समझते हैं? [1]
- प्रभाव की सीमा
- जादू का असर
- रूप के समान
- निश्चित प्रभाव
- बाजार का असर कब अधिक होता है? [1]
- जेब और मन खाली होने पर
- जेब और मन भरे होने पर
- जेब भरी और मन खाली होने पर
- जेब खाली और मन भरे होने पर
- मन खाली और जेब भरी होने पर बाजार का प्रभाव कैसा होता है? [1]
- सहयोगी
- उपहासक
- मर्यादित
- विनाशक
- बाजार का सभी सामान उपयोगी लगने के क्या कारण हो सकते हैं? [1]
- जादू का असर
- सामान की कमी
- सब कुछ खरीदने की इच्छा।
- संतुलित मन के कारण।
आकलन
उत्तर
- जरूरत पैदा करने के कारण।
- जादू का असर
- जेब भरी और मन खाली होने पर
व्याख्या: बाज़ार का असर तब अधिक होता है जब जेब भरी हो और मन खाली हो। - मर्यादित
- जादू का असर
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