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प्रश्न
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपुर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
सामने कुहरा घना है और मैं सूरज नहीं हूँ क्या इसी अहसास में जिऊँ या जैसा भी हूँ नन्हा-सा एक दिया तो हूँ क्यों न उसी की उजास में जिऊँ हर आने वाला क्षण मुझे यही कहता है- आरे भई, सूरज तो नहीं हो तुम और मैं कहता हूँ है न सही सूरज एक नन्हा दिया तो हूँ जितनी भी है लौ मुझमें उसे लेकर जिया तो हूँ। कम-से-कम मैं उनमें तो नहीं जो चाँद दिल के बुझाएँ बैठे हैं रात को अमावस बनाए बैठे हैं उड़ते फिर रहे थे जो जुगनू आँगन में उन्हें भी मुट्ठियों में दबाए बैठे हैं। |
- सामने कुहरा घना है- पंक्ति में 'कुहरा' किस ओर संकेत करता है? [1]
- अँघेरा
- धुंध
- हताशा-निराशा
- अंधकार
- 'जैसा भी हूँ नन्हा-सा एक दिया तो हूँ' −कथन में निहित भाव है: [1]
- आत्मविश्वास का
- निराशा का
- हताशा का
- दृढ़ता का
- 'जो चाँद दिल के बुझाए बैठे हैं' पंक्ति द्वारा कवि ने किन्हें संबोधित किया है? [1]
- आत्मकेंद्रित व्यक्तियों को
- उत्साहहीन व्यक्तियों को
- अहंकारी व्यक्तियों को
- स्वाभिमानी व्यक्तियों को
- स्तंभ I में दिए गए पदों को स्तंभ II में दिए गए प्रतीकार्थों से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए: [1]
स्तंभ I स्तंभ II 1. सूरज (i) शक्तियों को नियंत्रण में करना 2. अमावस (ii) घनघोर निराशा 3. जुगनू दबाना (iii) सर्वशक्ति संपन्नता
- 1 - (i), 2 - (ii), 3 - (iii)
- 1 - (iii), 2 - (i), 3 - (ii)
- 1 - (iii), 2 - (ii), 3 - (i)
- 1 - (ii), 2 - (iii), 3 - (i)
- यह कविता क्या संदेश देती है? [1]
- चलते रहने का
- प्रकाश फैलाने का
- शक्ति भर जीने का
- शांत रहने का
आकलन
उत्तर
- हताशा-निराशा
- आत्मविश्वास का
- उत्साहहीन व्यक्तियों को
- 1 - (iii), 2 - (ii), 3 - (i)
- शक्ति भर जीने का
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