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प्रश्न
निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
अच्छा, मेरे महान कनु, मान लो कि क्षण भर को, मैं यह स्वीकार लूँ कि मेरे ये सारे तन्मयता के गहरे क्षण सिर्फ़ भावावेश थे, सुकोमल कल्पनाएँ थीं रँगे हुए, अर्थहीन, आकर्षक शब्द थे - मान लो कि क्षण भर को, मैं यह स्वीकार लूँ, कि पाप-पुण्य, धर्माधर्म, न्याय-दंड क्षमा-शीलवाला यह तुम्हारा युद्ध सत्य है- तो भी मैं क्या करूँ कनु, मैं तो वही हूँ, तुम्हारी बावरी मित्र। जिसे सदा उतना ही ज्ञान मिला जितना तुमने उसे दिया। |
- कृति पूर्ण कीजिए: (२)
कनुप्रिया की तन्मयता के गहरे क्षण, सिर्फ़ ........- ______________________
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- निम्नलिखित शब्दों के लिए पद्यांश में आए हुए विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (२)
- बुरा ×
- अस्वीकार ×
- असत्य ×
- अज्ञान ×
- 'युद्ध से विनाश होता है' इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)
आकलन
उत्तर
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- भावावेश थे, सुकोमल कल्पनाएँ थीं।
- रँगे हुए, अर्थहीन, आकर्षक शब्द थे।
- मान लो कि क्षण भर को, मैं यह स्वीकार लूँ कि पाप-पुण्य, धर्म-अधर्म, न्याय-दंड।
- क्षमा-शीलता वाला यह तुम्हारा युद्ध सत्य है।
-
- बुरा × अच्छा
- अस्वीकार × स्वीकार
- असत्य × सत्य
- अज्ञान × ज्ञान
- युद्ध मानवता के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है। यह न केवल जीवन की हानि करता है, बल्कि समाज, संस्कृति और सभ्यता को भी नष्ट कर देता है। युद्ध में कोई भी विजेता नहीं होता, हर कोई किसी न किसी रूप में हारता ही है। इतिहास गवाह है कि युद्धों ने केवल विनाश और दुख ही दिया है। इसलिए, शांति, प्रेम और आपसी समझ से ही समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है। हमें युद्ध नहीं, संवाद को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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