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प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
माँगे हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी हैं पर त्याग का कहीं नामों-निशान नहीं है। अपना स्वार्थ आज एकमात्र लक्ष्य रह गया है। हम चटखारे लेकर इसके या उसके भ्रष्टाचार की बातें करते हैं, पर क्या कभी हमने जाँचा है कि अपने स्तर पर अपने दायरे में हम उसी भ्रष्टाचार के अंग तो नहीं बन रहे हैं? काले मेघा दल के दल उमड़ते हैं, पानी झमाझम बरसता है, पर गगरी फूटी की फूटी रह जाती है, बैल पियासे के पियासे रह जाते हैं? आखिर कब बदलेगी यह स्थिति? |
- गद्यांश में प्रयुक्त 'त्याग' शब्द का समानार्थी शब्द हो सकता है: [1]
- त्योरस
- त्यजन
- त्यौनार
- त्योहार
- गद्यांश का केंद्रीय भाव है: [1]
- देश प्रेम की व्याख्या
- भ्रष्टाचार की व्याख्या
- वर्षा का वर्णन
- स्वार्थ और भ्रष्टाचार के दुष्परिणाम
- निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए गद्यांश के अनुसार सही कथन का चयन कर लिखिए: [1]
- जब मनुष्य निज स्वार्थ की सोचता है, तब वह देश हित के लिए भी कार्य करता है।
- जब मनुष्य अपने कर्तव्य से अधिक अधिकार की माँग करता है, तब वह त्याग का नाम भी लेता है।
- जब मनुष्य समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार पर चर्चा करता है, तो उसके उन्मूलन के विकल्प भी सोचता है।
- जब मनुष्य निज स्वार्थ को सर्वोपरि मानता है, तब वह भी भ्रष्टाचार का अंग बन जाता है।
- स्तंभ I में दिए गए कथनों के आशय को स्तंभ II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए: [1]
स्तंभ I स्तंभ II 1. पानी झमाझम बरसता है। (i) अपार धनराशि प्रेषित की जाती है। 2. काले मेघा दल के दल उमड़ते हैं। (ii) जन सामान्य की आवश्यकताएँ/स्थिति जस-की-तस रह जाती हैं। 3. गगरी फूटी रह जाती है, बैल पियासे रह जाते हैं। (iii) सहायता हेतु अनेक कल्याणकारी योजनाएँ बनती हैं।
- 1 - (i), 2 - (iii), 3 - (ii)
- 1 - (i), 2 - (ii), 3 - (iii)
- 1 - (iii), 2 - (i), 3 - (ii)
- 1 - (ii), 2 - (i), 3 - (iii)
- "खिर कब बदलेगी यह स्थिति?" गद्यांश से उद्धृत इस कथन के संदर्भ में लिखिए कि देश की स्थिति कैसे बदलेगी। [1]
- अपनी भलाई कर लेने से
- मन में विचार कर लेने से
- स्वार्थ और भ्रष्टाचार से दूरी बना लेने से
- सबको आजीविका प्राप्त होने से
आकलन
उत्तर
- त्यजन
- स्वार्थ और भ्रष्टाचार के दुष्परिणाम
- जब मनुष्य निज स्वार्थ को सर्वोपरि मानता है, तब वह भी भ्रष्टाचार का अंग बन जाता है।
- 1 - (i), 2 - (iii), 3 - (ii)
- स्वार्थ और भ्रष्टाचार से दूरी बना लेने से
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