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निम्नलिखित विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए: मेरी रेगिस्तान यात्रा संकेत बिंदु: धूल ही धूल, रात की शीलता और सौंदर्य, तापमान एवं लोक-संस्कृति - Hindi Course - B

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प्रश्न

निम्नलिखित विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए:

मेरी रेगिस्तान यात्रा

संकेत बिंदु:

  • धूल ही धूल
  • रात की शीलता और सौंदर्य
  • तापमान एवं लोक-संस्कृति
संक्षेप में उत्तर

उत्तर

मेरी रेगिस्तान यात्रा

मेरी रेगिस्तान यात्रा अविस्मरणीय थी। चारों ओर धूल ही धूल थी, जहां तक नजर जाती थी, रेत के ऊँचे-नीचे टीले दिखते थे। जीवन में प्रकृति के जिस रूप को आप नहीं देख पाते उसे देखने की इच्छा मन में अवश्य होती है। यही कारण है कि मेरे मन में भी बचपन से ही राजस्थान की मरुभूमि देखने की इच्छा थी। इसलिए, जब मेरी राजस्थान यात्रा का क्रम बना तो राजस्थान के उत्तरी पश्चिमी भाग में थार मरुस्थल के बीचों-बीच बसा शहर जैसलमेर मेरी प्राथमिकता में पहले स्थान पर था। दिन में तापमान बेहद ऊँचा था, जिससे गर्म हवाएँ चलती थीं, लेकिन रात में ठंडी शीतल हवा चलने लगी, और रेगिस्तान का सौंदर्य अपने चरम पर था। तारों से भरा आसमान बेहद मनमोहक दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। वहा की लोक-संस्कृति ने भी मुझे बहुत प्रभावित किया। उदयपुर से अपनी राजस्थान यात्रा आरंभ करने के बाद हम चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, माउंटआबू व जोधपुर होते हुए जैसलमेर पहुँचे। दिन के एक बजे तक हम जैसलमेर पहुँच चुके थे। भोजन के मामले में जैसलमेर महँँगा शहर है क्योंकि इस इलाके में पानी की कमी होने के कारण यहाँ खेती बहुत कम होती है। इस इलाके में ज्वार, बाजरा के अलावा और कुछ उपजता ही नहीं है।

अतिथि बनने पर शत्रुओं तक को उचित सम्मान देना, यहाँ की संस्कृति की विशेषता रही है। राजस्थानी संस्कृति पुरानी रही हैं किन्तु वह निरंतर विकासशील भी है। देश तथा विदेश में होने वाले नवीन परिवर्तन से वह अछूती नहीं हैं। अपनी परम्परागत विशेषताओं की रक्षा करते हुए वह नवीनता की लहरों में भी बह रही है। आधुनिकता और परम्परा का यह समन्वय राजस्थान की संस्कृति को जीवंत बनाए हुए है।

राजस्थान में दिन भले ही गर्मी और धूल से भरी हो परंतु रात में यहाँ का वातावरण शीतल हो जाता है। जहाँ एक ओर दिन में तापमान 22 डिग्री होता है वहीं रात में तापमान 4 डिग्री तक चला जाता है। यह प्रकृति की विचित्रता का ही रूप है। मरु प्रदेश राजपूताना राजस्थान का भारतीय सांस्कृतिक मानचित्र पर विशिष्ट स्थान रहा है। मरुस्थल में फलती-फूलती शूरवीरों और राजपुत्रों की यह धरा केवल शस्त्रों की झंकार के लिए ही नहीं बल्कि अपने उदार आतिथ्य भाव के लिए भी सदा से प्रसिद्ध रही है।

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