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निंदक के बारे में कबीर की राय समाज से पूरी तरह भिन्न थी। स्पष्ट कीजिए। - Hindi Course - B

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प्रश्न

निंदक के बारे में कबीर की राय समाज से पूरी तरह भिन्न थी। स्पष्ट कीजिए।

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उत्तर

निंदक अर्थात् आलोचकों के बारे में कबीर की राय समाज से बिलकुल भी मेल नहीं खाती थी। समाज के लोग निंदा के भय से आलोचकों को अपने आसपास फटकने भी नहीं देते हैं। इसके विपरीत कबीर का मत था कि निंदकों को अपने आसपास ही बसने की जगह देना चाहिए। ऐसा करना व्यक्ति के हित में होता है।

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साखी
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अध्याय 1.1: साखी - अतिरिक्त प्रश्न

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एनसीईआरटी Hindi - Sparsh Part 2 Class 10
अध्याय 1.1 साखी
अतिरिक्त प्रश्न | Q 8

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