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प्रश्न
पाण्ड्य सरदार (स्रोत-3) को दी जाने वाली वस्तुओं की तुलना दंगुन गाँव (स्रोत-8) की वस्तुओं से कीजिए। आपको क्या समानताएँ और असमानताएँ दिखाई देती हैं?
उत्तर
उल्लेखनीय है कि पांड्य सरदारों और गुप्त सरदारों दोनों को ही समय-समय पर अपनी-अपनी प्रजा से अनेक प्रकार की भेंटें उपलब्ध होती रहती थीं। पाठ्यपुस्तक के स्रोत तीन और स्रोत आठ के अध्ययन से पता चलता है कि दोनों को मिलने वाली भेंटों में कुछ समानताएँ और कुछ असमानताएँ विद्यमान थीं। समानताएँ-जब पांड्य सरदार सेनगुत्तुवन वन-यात्रा पर थे, तो उन्हें अपनी प्रजा से हाथीदाँत, सुगंधित लकड़ी, हिरणों के बाल से बने चँवर, मधु, चंदन, गेरु, सुरमा, हल्दी, इलायची, नारियल, आम, जुड़ी-बूटी, फल, प्याज, गन्ना, फूल, सुपारी जैसी महत्त्वपूर्ण वस्तुएँ एवं फल-फूल तथा बाघों के बच्चे, शेर, हाथी, बंदर, भालू, हिरण, कस्तूरी मृग, लोमड़ी, मोर, जंगली मुर्गे और बोलने वाले तोते जैसे महत्त्वपूर्ण पशु-पक्षी भेंट में प्राप्त हुए। इसी प्रकार गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय की पुत्री प्रभावती गुप्त के अभिलेख से पता लगता है कि दंगुन गाँव के लोग अधिकारियों को घास, आसनों में प्रयोग की जाने वाली जानवरों की खाल, कोयला, गाँव में उपलब्ध खनिज पदार्थ, खदिर वृक्ष के उत्पाद, फूल और दूध आदि भेट में देते थे।
इन दोनों उदाहरणों में महत्त्वपूर्ण समानता यह है कि लोगों द्वारा अपने-अपने सरदारों को समय-समय पर अनेक वस्तुएँ भेंट में प्रदान की जाती थीं। दोनों उदाहरणों में स्थानीय रूप से उपलब्ध वस्तुओं के भेंट में दिए जाने का संकेत मिलता है। असमानताएँ-दोनों उदाहरणों में एक महत्त्वपूर्ण असमानता यह है कि पांड्य सरदार को मिलने वाली वस्तुओं की सूची गुप्त अथवा वाकाटक सरदार को मिलने वाली वस्तुओं की सूची की अपेक्षा अधिक विशाल है। प्रभावती गुप्त के अभिलेख से पता चलता है कि वाकाटक अधिकार क्षेत्रों में राज्य को मदिरा खरीदने और नमक हेतु खुदाई करने के राजसी अधिकारों को लागू करवाए जाने का भी अधिकार था। किंतु पांड्य अधिकार क्षेत्रों में हमें ऐसा कोई उल्लेख नहीं मिलता। एक अन्य महत्त्वपूर्ण असमानता जो हमें दृष्टिगोचर होती है यह है कि पांड्य राज्य के लोगों ने नाचते-गाते हुए ठीक उसी प्रकार सेनगुत्तुवन का स्वागत किया जैसे पराजित लोग विजयी का आदर करते हैं। संभवतः पांड्य राज्य में लोग स्वेच्छापूर्वक अधिक-से-अधिक वस्तुएँ अपने शासकों को भेंट के रूप में प्रदान करते थे। ऐसा लागता है कि वाकाटक अधिकार क्षेत्रों में लोग शासकीय अधिकारियों को दायित्व के रूप में भेट प्रदान करते थे।