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पिछले सुख की स्मृति आँखों में क्षण भर एक चमक है लाती - इसमें किसान के किन पिछले सुखों की ओर संकेत किया गया है? - Hindi (Core)

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प्रश्न

पिछले सुख की स्मृति आँखों में क्षण भर एक चमक है लाती - इसमें किसान के किन पिछले सुखों की ओर संकेत किया गया है?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

'पिछले सुख की स्मृति आँखों में क्षण भर एक चमक है लाती' इन पंक्तियों में किसान के पिछले उन सुखों की ओर संकेत किया गया है जिसे याद करके किसान की आँखों में चमक आ जाती है।किसान के छोटे परिवार में उसकी पत्नी, पुत्र, पुत्री, पुत्रवधू सभी थे जिसके साथ वह सुखी जीवन व्यतीत कर रहा था।उसके हरे-भरे लहलहाते खेत थे तथा दूध देने वाली गाय और खेती के लिए बैलों की जोड़ी थी।यहाँ इन्हीं सुखों की ओर संकेत किया गया है।

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वे आँखें
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अध्याय 2.04: वे आँखें - अभ्यास [पृष्ठ १४९]

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एनसीईआरटी Hindi - Aaroh Class 11
अध्याय 2.04 वे आँखें
अभ्यास | Q 3. | पृष्ठ १४९

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अंधकार की गुहा सरीखी
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क. आमतौर पर हमें डर किन बातों से लगता है?

ख. उन आँखों से किसकी ओर संकेत किया गया है?

ग. कवि को उन आँखों से डर क्यों लगता है?

घ. डरते हुए भी कवि ने उस किसान की आँखों की पीड़ा का वर्णन क्यों किया है?

ङ. यदि कवि इन आँखों से नहीं डरता क्या तब भी वह कविता लिखता?


कविता में किसान की पीड़ा के लिए किन्हें जिम्मेदार बताया गया है?


संदर्भ सहित आशय स्पष्ट करें-

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संदर्भ सहित आशय स्पष्ट करें -

घर में विधवा रही पतोहू
लछमी थी, यद्यपि पति घातिन,


संदर्भ सहित आशय स्पष्ट करें - 

पिछले सुख की स्मृति आँखों में
क्षण भर एक चमक है लाती,
तुरत शून्य में गड़ वह चितवन,
तीखी नोक सदृश बन जाती।


“घर में विधवा रही पतोहू ...../ खैर पैर की जूती, जोरू/एक न सही दूजी आती” इन पंक्तियों को ध्यान में रखते हुए ‘वर्तमान समाज और स्त्री’ विषय पर एक लेख लिखें।


किसान अपने व्यवसाय से पलायन कर रहे हैं इस विषय पर परिचर्चा आयोजित करें तथा कारणों की भी पड़ताल करें।


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