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प्रस्‍तुत कविता की अपनी पसंदीदा किन्हीं दो पंक्‍तियों का भावार्थ लिखिए । - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

प्रस्‍तुत कविता की अपनी पसंदीदा किन्हीं दो पंक्‍तियों का भावार्थ लिखिए ।

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उत्तर

विजय केवल लोहे की नहीं, धर्म की रही धरा पर धूम

भिक्षु होकर रहते सम्राट, दया दिखलाते घर-घर घूम।

भावार्थ- भारतीयों ने शस्त्रों के बल पर दूसरे देशों को नहीं जीता, बल्कि उन्होंने प्रेमभाव से लोगों के हृदय जीते हैं। भारत में प्राचीन काल से ही लोगों के मन में धर्म की भावना रही है। यहाँ वर्धमान महावीर और गौतम बुद्ध जैसे त्यागी धर्मपुरुष हुए हैं, जिन्होंने अपना विशाल साम्राज्य छोड़कर भिक्षु का स्वरूप धारण किया और घर-घर घूमकर लोगों का कष्ट दूर करने का प्रयास किया, धर्म का प्रचार किया।

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भारत महिमा
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अध्याय 1.01: भारत महिमा - स्‍वाध्याय [पृष्ठ २]

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बालभारती Hindi - Lokbharati 10 Standard SSC Maharashtra State Board
अध्याय 1.01 भारत महिमा
स्‍वाध्याय | Q (४) | पृष्ठ २

संबंधित प्रश्न

निम्‍नलिखित पंक्‍तियों का तात्‍पर्य लिखिए :

कहीं से हम आए थे नही - ______.


निम्‍नलिखित पंक्‍तियों का तात्‍पर्य लिखिए :

वही हम दिव्य आर्य संतान - ______.


लिखिए :

कविता मेें प्रयुक्त दो धातुओं के नाम :


प्रस्‍तुत कविता की अपनी पसंदीदा किन्हीं दो पंक्‍तियों का भावार्थ लिखिए ।


निम्‍नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्‌य विश्लेषण कीजिए :

रचनाकार का नाम


निम्‍नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्‌य विश्लेषण कीजिए :

रचना का प्रकार


निम्‍नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्‌य विश्लेषण कीजिए :

पसंदीदा पंक्ति


निम्‍नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्‌य विश्लेषण कीजिए :

पसंदीदा होने का कारण


निम्‍नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्‌य विश्लेषण कीजिए :

रचना से प्राप्त संदेश


निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

चरित थे पूत, भुजा में शक्‍ति, नम्रता रही सदा संपन्न

हृदय के गौरव में था गर्व, किसी को देख न सके विपन्न ।

हमारे संचय में था दान, अतिथि थे सदा हमारे देव

वचन में सत्‍य, हृदय में तेज, प्रतिज्ञा में रहती थी टेव ।

वही है रक्‍त, वही है देश, वही साहस है, वैसा ज्ञान

वही है शांति, वही है शक्‍ति, वही हम दिव्य आर्य संतान ।

जिएँ तो सदा इसी के लिए, यही अभिमान रहे यह हर्ष

निछावर कर दें हम सर्वस्‍व, हमारा प्यारा भारतवर्ष ।

(1) उचित जोड़ियाँ मिलाकर लिखिए: (2)

 
(i) ______ ______
(ii) ______ ______
(iii) ______ ______
(iv) ______ ______

(2) (i) उपसर्ग और प्रत्यय लगाकर नये शब्द लिखिए: (1)

उपसर्गयुक्त नम्र प्रत्यययुक्त
______ ______

(ii) निम्न शब्दों के लिए पद्यांश में आए विलोमार्थी शब्द लिखिए: (1)

  1. अज्ञान ×
  2. दानव ×

(3) पद्यांश की प्रारंभिक चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)


निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए:

मुद्दे भारत महिमा
(1) रचनाकार का नाम  
(2) रचना की विधा  
(3) पसंद की पंक्तियाँ  
(4) पंक्तियाँ पसंद होने का कारण  
(5) रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा  

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

'चरित थे पूत, भुजा में शक्ति, नम्रता रही सदा संपन्न
हृदय के गौरव में था गर्व, किसी को देख न सके विपन्न।
हमारे संचय में था दान, अतिथि थे सदा हमारे देव
वचन में सत्य, हृदय में तेज, प्रतिज्ञा में रहती थी टेव।
वही है रक्त, वही है देश, वहीं साहस है, वैसा ज्ञान
वही है शांति, वही है शक्ति, वही हम दिव्य आर्य संतान।
जिएँ तो सदा इसी के लिए, यही अभिमान रहे यह हर्ष
निछावर कर दें हम सर्वस्व हमारा प्यारा भारतवर्ष।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए-  (2)

(2) पद्यांश में ढूँढ़कर लिखिए-

(i) ऐसे शब्द जिनका अर्थ निम्न शब्द हो-  (1)

  1. पवित्र अर्थ के लिए प्रयुक्त शब्द - ______
  2. गरीब अर्थ के लिएं प्रयुक्त शब्द - ______

(ii) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए-  (1)

वचन में सत्य, हृदय में तेज, प्रतिज्ञा में रहती थी टेव।

(3) प्रस्तुत पद्यांश की किन्हीं दो पंक्तियों का भावार्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)


निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

हिमालय के आँगन में उसे, किरणों का दे उपहार

उषा ने हँस अभिनंदन किया, और पहनाया हीरक हार।

जगे हम, लगे जगाने विश्व, लोक में फैला फिर आलोक

व्योमतम पुंज हुआ तब नष्‍ट, अखिल संसृति हो उठी अशोक।

विमल वाणी ने वीणा ली, कमल कोमल कर में सप्रीत

सप्तस्‍वर सप्तसिंधु में उठे, छिड़ा तब मधुर साम संगीत।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए- (2)

(i)

(ii)

(2) (i) पद्यांश में ढूँढ़कर लिखिए- (1)

  1. हीरों का हार - ______
  2. शोकरहित - ______

(ii) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए- (1)

हिमालय के आँगन में उसे, किरणों का दे उपहार

(3) प्रस्तुत पद्यांश की किन्हीं दो पंक्तियों का भावार्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)


निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

किसी का हमने छीना नहीं, प्रकृति का रहा पालना यहीं
हमारी जन्मभूमि थी यहीं, कहीं से हम आए थे नहीं।
चरित थे पूत, भुजा में शक्‍ति, नम्रता रही सदा संपन्न
हृदय के गौरव में था गर्व, किसी को देख न सके विपन्न।
हमारे संचय में था दान, अतिथि थे सदा हमारे देव
वचन में सत्‍य, हृदय में तेज, प्रतिज्ञा में रहती थी टेव।
वही है रक्‍त, वही है देश, वही साहस है, वैसा ज्ञान
वही है शांति, वही है शक्‍ति, वही हम दिव्य आर्य संतान।
जिएँ तो सदा इसी के लिए, यही अभिमान रहे यह हर्ष
निछावर कर दें हम सर्वस्‍व, हमारा प्यारा भारतवर्ष।

  1. उत्तर लिखिए:          [2]
    वचन में संचय में भुजा में प्रतिज्ञा में
    ______ ______ ______ ______
    1. पद्यांश से विलोम शब्द की जोड़ी ढूढकर लिखिए:        [1]
      ______ x ______
    2. निम्नलिखित शब्दों के वचन पहचानकर लिखिए:       [1]
      1. भारत - ______
      2. भुजाएँ - ______
  2. उपर्युक्त पद्यांश अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।      [2]

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