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प्रश्न
‘परिवर्तन सृष्टि का नियम है’ इस संदर्भ में अपना मत व्यक्त कीजिए।
उत्तर
परिवर्तन इस सृष्टि का शाश्वत नियम है। इस संसार में कुछ भी स्थिर नहीं है। परिवर्तन का चक्र हमेशा चलता रहता है। इसी नियम के कारण सृष्टि चल रही है। यहाँ कुछ भी स्थायी नहीं है। प्रात:काल से संध्या तक हम नित्य कई परिवर्तन देखते हैं। आज जो समय है कल वह नहीं होगा। समय के साथ सभी जीवों व निर्जीवों में हमें बदलाव दिखाई देता है। इसी प्रकार प्रतिवर्ष एक के बाद दूसरी ऋतु का आना इसी परिवर्तन का दूयोतक है। जेठ की तपती दुपहरियों के बाद वर्षा का आगमन ऐसा लगता है मानो नवजीवन की प्राप्ति हुई हो। यही बदलाव जिंदगी का दूसरा नाम है। इसी बदलाव के कारण मानव के साथ ही सभी जीवों के जीवन में गति दिखाई देती है। पतझड़ के बाद वसंत की बहार कुछ अधिक ही अच्छी लगती है। यदि पतझड़ न होता, तो वसंत का भी ऐसा महत्त्व न होता। परिवर्तन का रुकना जीवन के रुकने के समान है। अच्छे-बुरे सारे परिवर्तन जीवन मैं रंग भर देते हैं। सुख-दुख, हार-जीत, हानि-लाभ इसी परिवर्तन कां परिणाम हैं। यदि पुराने सिद्धांतों के स्थान पर नए नियम, नए सिद्धांत न आते, तो मानव समाज इतनी उन्नति न कर पाता, जहाँ आज हम हैं। अत: जीवन को रंगीन व गतिशील बनाए रखने के लिए परिवर्तन बहुत जरूरी है।
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(अ) | (आ) |
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मेघ |
संजाल पूर्ण कीजिए:
स्वमत लिखिए:
अगर सागर न होता तो ______
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