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प्रश्नोत्तर एवं चर्चा के माध्यम से गजलों के भाव स्पष्ट करें. - Marathi (Second Language) [मराठी (द्वितीय भाषा)]

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प्रश्न

प्रश्नोत्तर एवं चर्चा के माध्यम से गजलों के भाव स्पष्ट करें। 

दीर्घउत्तर

उत्तर

ग़ज़लों के भावों की संक्षिप्त व्याख्या

  • "बेटियाँ": यह ग़ज़ल बेटियों के महत्व और उनकी विशेषता को उजागर करती है। इसमें बताया गया है कि बेटियाँ केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की गरिमा होती हैं। वे अपने संस्कार, मेहनत और प्रेम से दो परिवारों को संवारती हैं। बेटियाँ भगवान का आशीर्वाद हैं, जो जीवन को सुंदर और सुखद बनाती हैं।
    • प्रश्न 1: इस ग़ज़ल में बेटियों की तुलना किन चीज़ों से की गई है?
      उत्तर: बेटियों को पूजा के आंगन, मन्नतों जैसी पवित्र, स्नेह और समर्पण का प्रतीक, उपवन, सावन और चंदन कहा गया है।

    • प्रश्न 2: "दो घरों की छवि बनाने के लिए, दो घरों की एक दर्पण बेटियाँ।" इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
      उत्तर: बेटियाँ मायके और ससुराल दोनों की प्रतिष्ठा बनाए रखती हैं और अपने अच्छे संस्कारों से इन परिवारों को सम्मान दिलाती हैं।

    • प्रश्न 3: ग़ज़ल का मुख्य संदेश क्या है?
      उत्तर: यह ग़ज़ल बताती है कि बेटियाँ कोई बोझ नहीं, बल्कि समाज की अमूल्य धरोहर हैं और उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।

  • "असर": यह ग़ज़ल संघर्ष, आत्मसम्मान और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। इसमें बताया गया है कि हमें केवल बाहरी दिखावे से प्रभावित नहीं होना चाहिए, बल्कि सच्चे मूल्यों को अपनाकर आगे बढ़ना चाहिए। व्यक्ति को अपनी असली पहचान बनाए रखना चाहिए, न कि केवल बाहरी चमक-धमक पर ध्यान देना चाहिए।
    • प्रश्न 1: "आँख में नई मंज़िल, पाँव में सफर रखना।" इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
      उत्तर: इसका अर्थ है कि व्यक्ति को अपने जीवन में सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए।
    • प्रश्न 2: "चाँदी से मिल कर भी, धूप की खबर रखना।" इस पंक्ति का क्या भाव है?
      उत्तर: इसका अर्थ है कि सफलता पाने के बाद भी व्यक्ति को अपने संघर्षों को नहीं भूलना चाहिए।
    • प्रश्न 3: इस ग़ज़ल में "आईना" शब्द किसे दर्शाता है?
      उत्तर: "आईना" यहाँ आत्मविश्लेषण और सच्चाई का प्रतीक है, जो बताता है कि व्यक्ति को खुद की पहचान बनाए रखनी चाहिए।
    • प्रश्न 4: ग़ज़ल का मुख्य संदेश क्या है?
      उत्तर: इस ग़ज़ल का संदेश है कि हमें अपने आत्मसम्मान और मूल्यों को बनाए रखते हुए जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। बाहरी दिखावे के बजाय अपनी असली पहचान को कायम रखना आवश्यक है।

"बेटियाँ" ग़ज़ल बेटियों के सम्मान और उनकी महत्ता को दर्शाती है।

"असर" ग़ज़ल संघर्ष, आत्मसम्मान और सच्चे मूल्यों को अपनाने की सीख देती है।

यह ग़ज़लें हमें सिखाती हैं कि हमें बेटियों का सम्मान करना चाहिए और अपने आत्मसम्मान व सच्चाई को बनाए रखना चाहिए।

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अध्याय 1.3: (अ) दो गजलें - अंतःपाठ प्रश्न [पृष्ठ ९]

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बालभारती Integrated 7 Standard Part 2 [Hindi Medium] Maharashtra State Board
अध्याय 1.3 (अ) दो गजलें
अंतःपाठ प्रश्न | Q १. | पृष्ठ ९
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