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'पूरक पाठ्य-पुस्तक' के पाठ पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए: 'माता का अँचल' पाठ में वर्णित बच्चों के खेल अलग थे और वर्तमान काल में अलग हैं। - Hindi Course - A

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प्रश्न

'पूरक पाठ्य-पुस्तक' के पाठ पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए:

'माता का अँचल' पाठ में वर्णित बच्चों के खेल अलग थे और वर्तमान काल में अलग हैं। दोनों में भिन्‍नता का विवरण देते हुए अपने विचार भी लिखिए।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

'माता का अँचल' पाठ में वर्णित बच्चों के खेल और वर्तमान काल के बच्चों के खेलों में महत्वपूर्ण भिन्नताएँ हैं। इस पाठ में बच्चों के खेल सरल, प्राकृतिक और पारंपरिक होते थे। बच्चे प्रकृति के साथ जुड़े होते थे और उनके खेल शारीरिक गतिविधियों पर आधारित होते थे, जैसे कि पेड़ों पर चढ़ना, पतंग उड़ाना, गिल्ली-डंडा, और मिट्टी के खिलौनों से खेलना। इन खेलों में सामूहिकता, शारीरिक व्यायाम और सादगी थी।

वर्तमान काल में, बच्चों के खेल डिजिटल हो गए हैं। आज के बच्चे मोबाइल गेम्स, वीडियो गेम्स और कंप्यूटर आधारित खेलों की ओर अधिक आकर्षित हैं। ये खेल आभासी दुनिया में होते हैं और बच्चों की शारीरिक गतिविधि को सीमित कर देते हैं। इसके साथ ही, बच्चों का अधिकतर समय स्क्रीन के सामने बीतने लगा है, जिससे उनमें बाहरी खेलों का रुझान कम होता जा रहा है। आजकल के बच्चे साइकिल चलाना, तैरना, क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, बास्केटबॉल, वीडियो गेम आदि खेलना पसंद करते हैं। अधिकांश बच्चे अपने घर में रहकर ही अकेले खेलना चाहते हैं। ऐसे में वे प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं।

मेरे विचार से, पहले के खेल बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास में सहायक होते थे, क्योंकि वे बच्चों को प्रकृति के करीब ले जाते थे और सामूहिकता का अनुभव कराते थे। जबकि आज के डिजिटल खेलों से बच्चे तकनीकी रूप से तो तेज़ हो रहे हैं, लेकिन शारीरिक और सामाजिक रूप से उनका विकास बाधित हो रहा है। हमें इस बदलाव को समझते हुए बच्चों को संतुलन सिखाना चाहिए, ताकि वे दोनों प्रकार के खेलों का आनंद ले सकें और पूर्ण विकास कर सकें।

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