हिंदी

राजकोषीय घाटे से सरकार को ऋण ग्रहण की आवश्यकता होती है। समझाइए। - Economics (अर्थशास्त्र)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

राजकोषीय घाटे से सरकार को ऋण ग्रहण की आवश्यकता होती है। समझाइए।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

यह कहना बिल्कुल उचित है कि राजकोषीय घाटे से सरकार को ऋण की आवश्यकता होती है। राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और ऋण ग्रहण को छोड़कर कुल प्राप्तियों का अंतर है।
सकल राजकोषिय घाटा = कुल व्यये – (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण से सृजित पूँजीगत प्राप्तियाँ)
हम जानते हैं दोहरे लेखांकन प्रणाली के अनुसार सरकार का कुल व्यय और कुल प्राप्तियाँ बराबर होनी ही चाहिए, क्योंकि सरकार ने जो व्यय किया है उसका भुगतान तो इसे करना ही होगा चाहे वह ऋण लेकर करे चाहे नये नोट छापकर जिसे घाटे की वित्त व्यवस्था कहा जाता है। अतः राजकोषीय घाटा सरकार की कुल ऋण ग्रहण की आवश्यकता के बराबर होता है।
राजकोषीय घाटा = ऋण से सृजित पूँजीगत प्राप्तियाँ

shaalaa.com
सरकारी बजट-अर्थ तथा इसके अवयव
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 5: सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था - अभ्यास [पृष्ठ ८९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Economics - Introductory Macroeconomics [English] Class 12
अध्याय 5 सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था
अभ्यास | Q 3. | पृष्ठ ८९

संबंधित प्रश्न

सार्वजनिक वस्तु सरकार के द्वारा ही प्रदान की जानी चाहिए। क्यों? व्याख्या कीजिए।


राजस्व व्यय और पूँजीगत व्यय में भेद कीजिए।


मान लीजिए एक विशेष अर्थव्यवस्था में निवेश 200 के बराबर है। सरकार के क्रय की मात्रा 150 है, निवल कर (अर्थात् इकमुश्त कर से अंतरण को घटाने पर) 100 है और उपभोग C = 100 + 0.75 दिया हुआ है तो

  1. संतुलन आय स्तर क्या है?
  2. सरकारी व्यय गुणांक और कर गुणांक के मानों की गणना करो।
  3. यदि सरकार . के व्यय में 200 की बढ़ोतरी होती है, तो संतुलन आय में क्या परिवर्तन होगा?

सरकारी घाटे और सरकारी ऋण ग्रहण में क्या संबंध है? व्याख्या कीजिए।


एक ऐसी अर्थव्यवस्था पर विचार कीजिए, जिसमें निम्नलिखित फलन हैं-
C = 20 + 0.8y, I = 30, G = 50, TR = 100

  1. आय का संतुलन स्तर और मॉडल में स्वायत्त व्यय ज्ञात कीजिए।
  2. यदि सरकार के व्यय में 30 की वृद्धि होती है तो संतुलन आय पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
  3. यदि एकमुश्त कर 30 जोड़ दिया जाए जिससे सरकार के क्रय में बढ़ोत्तरी का भुगतान जा सके, तो संतुल आय में किस प्रकार का परिवर्तन होगा?

उपर्युक्त प्रश्न में अंतरण में 10% की वृद्धि और एकमुश्त करों में 10% की वृद्धि का निर्गत पर पड़ने वाले प्रभाव की गणना करें। दोनों प्रभावों की तुलना करें।


हम मान लेते हैं कि C = 70 + 0.70yD (0.70 yD), I = 90, G = 100, T = 0.10 है तो

  1. संतुलन आय ज्ञात करो।
  2. संतुलन आय पर करे राजस्व क्या है? क्या सरकार का बजट संतुलित बजट है?

मान लीजिए कि सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति 0.75 है और अनुपातिक आय कर 20% है। संतुलन आय में निम्नलिखित 4 परिवर्तनों को ज्ञात करो।

  1. सरकार के क्रय में 20% की वृद्धि
  2. अंतरण में 20% की कमी।

निरपेक्ष मूल्य में कर गुणक सरकारी व्यय गुणक से छोटा क्यों होता है? व्याख्या कीजिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×