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प्रश्न
रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक गीत लिखे, जिन्हें आज भी गाया जाता है और उसे रवींद्र संगीत कहा जाता है। यदि संभव हो तो रवींद्र संगीत संबंधी कैसेट व सी.डी. सुनिए।
उत्तर
छात्र स्वयं करें।
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि किससे और क्या प्रार्थना कर रहा है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
'विपदाओं से मुझे बचाओं, यह मेरी प्रार्थना नहीं' − कवि इस पंक्ति के द्वारा क्या कहना चाहता है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि सहायक के न मिलने पर क्या प्रार्थना करता है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
'आत्मत्राण' शीर्षक की सार्थकता कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
क्या कवि की यह प्रार्थना आपको अन्य प्रार्थना गीतों से अलग लगती है? यदि हाँ, तो कैसे?
निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
नत शिर होकर सुख के दिन में
तव मुख पहचानँ छिन-छिन में।
निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
तरने की हो शक्ति अनामय
मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना नहीं सही।
अनेक अन्य कवियों ने भी प्रार्थना गीत लिखे हैं, उन्हें पढ़ने का प्रयास कीजिए; जैसे
- महादेवी वर्मा- क्या पूजा क्या अर्चन रे!
- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला- दलित जन पर करो करुणा।
- इतनी शक्ति हमें देना दाता
मन का विश्वास कमज़ोर हो न
हम चलें नेक रस्ते पर हम से
भूल कर भी कोई भूल हो न
इसे प्रार्थना को ढूँढ़कर पूरा पढ़िए और समझिए कि दोनों प्रार्थनाओं में क्या समानता है? क्या आपको दोनों में कोई भी अंतर प्रतीत होता है? इस पर आपस में चर्चा कीजिए।
रवींद्रनाथ ठाकुर की ‘गीतांजलि’ को पुस्तकालय से लेकर पढ़िए।
रवींद्रनाथ ठाकुर ने कलकत्ता (कोलकाता) के निकट एक शिक्षण संस्थान की स्थापना की थी। पुस्तकालय की मदद से उसके विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए।
‘दुख’ के संबंध में हमारी प्रार्थना और कवि की प्रार्थना में क्या अंतर है?
‘आत्मत्राण’ कविता में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए।
'तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में' का भाव है -
'आत्मत्राण' कविता में कवि किससे छुटकारा प्राप्त करना चाहता है?