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संजाल पूर्ण कीजिए : - Hindi

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प्रश्न

संजाल पूर्ण कीजिए :

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उत्तर

(१) मोह को त्यागना
(२) बुद्धि को श्रेष्ठ मानना
(३) प्रेमभाव जाग्रत करना
(४) सच्चे मन से गुरु से ज्ञान पाना

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गुरुबानी
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अध्याय 5.1: गुरुबानी - आकलन [पृष्ठ २५]

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बालभारती Hindi - Yuvakbharati 12 Standard HSC Maharashtra State Board
अध्याय 5.1 गुरुबानी
आकलन | Q 1 | पृष्ठ २५

संबंधित प्रश्न

कृति पूर्ण कीजिए :-


'गुरु बिन ज्ञान न होई' उक्ति पर अपने विचार लिखिए ।


'ईश्वर भक्ति में नामस्मरण का महत्व होता है', इस विषय पर अपना मंतव्य लिखिए।


‘गुरुनिष्ठा और भक्तिभाव से ही मानव श्रेष्ठ बनता है’ इस कथन के आधार पर कविता का रसास्वादन कीजिए ।


गुरु नानक जी की रचनाओं के नाम लिखिए।


गुरु नानक जी की भाषाशैली की विशेषताएँ :


निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

तेरी गति मिति तूहै जाणहि किआ को आखि वखाणै
तू आपे गुपता, आपे परगटु, आपे सभि रंग माणै
साधिक सिध, गुरू बहु चेले खोजत फिरहि फुरमाणै
मागहि नामु पाइ इह भिखिआ तेरे दरसन कउ कुरबाणै
अबिनासी प्रभि खेलु रचाइआ, गुरमुखि सोझी होई।
नानक सभि जुग आपे वरतै, दूजा अवरु न कोई ।।

गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने।
तारिका मंडल जनक मोती।
धूपु मलआनलो, पवणु चवरो करे,
सगल बनराइ फूलंत जोती।
कैसी आरती होई।। भव खंडना, तेरी आरती।
अनहता सबद वाजंत भेरी ।।

(१) कृति पूर्ण कीजिए: (२)

(२) उचित मिलान कीजिए: (२)

(१) ईश्वर काल
(२) आकाश प्रभु
(३) समय खोजता
(४) खोज गगन

(३) ‘विद्यार्थी जीवन में गुरु का महत्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)


निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतिया कीजिए:

नानक गुरु न चेतनी मनि आपणे सुचेत। 
छूते तिल बुआड़ जिक सुएं अंदर खेत ॥ 
खेते अंदर छुट्टयां कहु नानक सऊ नाह।
'फली अहि फूली अहि बपुड़े भी तन बिच स्वाहं॥१॥
जलि मोह घसि मसि करि,
मति कागद करि सारु,
भाइ कलम करिं चितु, लेखारि,
गुरु पुछि लिखु बीचारि,
लिखु नाम सालाह लिखु,

1. संजाल पूर्ण कीजिए।  (2)

2. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए:   (2)

  1. मति 
  2. सुचेत
  3. लेखारि
  4. सऊ

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए:  (2)

'गुरु बिन ज्ञान न होइ' इस उक्ति पर अपना मत स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'गुरुबानी' कविता का रसास्वादन कीजिए:

  1. रचनाकर का नाम (१) -
  2. पसंद की पंक्तियाँ (१) -
  3. पसंद आने के कारण (२) -
  4. कविता की केंद्रीय कल्पना (२) -

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए: 

जालि मोहु घसि मसि करि,
मति कागद करि सारु,
भाइ कलम करि चितु लेखारी
गुर पुछि लिखु बीचारि,
लिखु नामु सालाह लिखु,
लिखु अंतु न पारावार।।

मन रे अहिनिसि हरि गुण सारि।
जिन खिनु पलु नाम न बिसरे ते जन विरले संसारि।
जोती-जोति मिलाइये, सुरती सुरति संजोगु।
हिंसा हउमें गतु गए नाही सहसा सोगु।
गुरुमुख जिसु हरि मनि बसे तिसु मेले गुरु संजोग।।

  1. (१) सहसंबंध लिखिए:        [2]
    (१) मोह को जलाकर और घिसकर बनाइए विरले
    (२) श्रेष्ठ कागज बनाना है, इससे प्रभु के दर्शन
    (३) संसार में हरि का नाम न भूलने वाले स्याही
    (४) जिसने प्रभु के नाम की माला जपी उसे मति
  2. निम्नलिखित शब्दों के उपसिर्ग हटाकर पद्यांश में आए हुए मूलशब्द दूँढकर लिखिए:      [2]
    1. सुमति - ______
    2. सदगुण - ______
    3. निर्जन -  ______
    4. अहिंसा - ______
  3. "गुरु का महत्त्व" इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए।       [2]

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