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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) ९ वीं कक्षा

‘शालेय अनुशासन और विद्‍यार्थी’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए। - Hindi [हिंदी]

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प्रश्न

‘शालेय अनुशासन और विद्‍यार्थी’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।

दीर्घउत्तर

उत्तर

अनुशासन प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के लिए आवश्यक होता है। विद्यार्थी के जीवन में अनुशासन का एक महत्वपूर्ण स्थान होता है। अनुशासन के जरिए ही विद्यार्थी अपने जीवन में सफलता हासिल कर सकता है। अनुशासन विद्यार्थी को सही मार्ग दिखाने में सहायता करता है। अनुशासन में अनु का अर्थ होता है पालन और शासन का अर्थ होता है नियम। संपूर्ण अर्थों में अनुशासन का अर्थ होता है नियमों का पालन करना। अनुशासन एक ऐसी कला है जो व्यक्ति को जीवन जीने का तरीका बताती है। बड़ों का सम्मान करना, माता-पिता का आदर करना, अध्यापकों का सम्मान करना, धैर्य रखना और लगातार परिश्रम करना यह सब अनुशासन की नीतियों के अंतर्गत आता है। हम कह सकते हैं कि अनुशासन भी दो प्रकार का होता है। एक वह जो हम अपने आपसे सीखते हैं उसे आत्मानुशासन कहते हैं। दूसरा वह जो किसी अन्य को देखकर सीखा जाता है, उसे प्रेरित अनुशासन कहा जाता है। आज बढ़ती हुई अनुशासनहीनता के अनेक कारण हैं। हमारी दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के बीच मधुर संबंधों का अभाव, कर्मचारियों एवं अधिकारियों की स्वार्थी भावना, कर्तव्य निष्ठा का अभाव, राजनीति में भ्रष्टाचार व स्वार्थी प्रवृत्ति का बोलबाला आदि अनेक ऐसे कारण हैं जिनसे हमारे सारे समाज और राष्ट्र का वातावरण दूषित हो रहा है। इन सभी कारणों से हमारे छात्र तथा युवा अनुशासनरहित हो रहे हैं। वे स्वतंत्रता का गलत अर्थ मानकर अनुशासन का पालन नहीं कर रहे हैं। प्रत्येक नागरिक में कर्तव्य भावना का जागरण, अपनों से बड़ों के प्रति आदर भावना, अनुशासन के विकास हेतु यह महत्वपूर्ण सुझाव है। हमें महापुरुषों एवं अपने आदर्श व्यक्तित्व के चरित्र को आदर्श मानकर उनका अनुकरण करना चाहिए। समाज के परिवारजनों को भी अपने बच्चों को अनुशासन में रहने की शिक्षा देनी चाहिए। तभी यह समाज बदल पाएगा और अनुशासन हर एक विद्यार्थी के जीवन में रह पाएगा।

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अच्छा पड़ोस
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अध्याय 1.03: अच्छा पड़ोस - स्वाध्याय [पृष्ठ १२]

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बालभारती Hindi - Kumarbharati 9 Standard Maharashtra State Board
अध्याय 1.03 अच्छा पड़ोस
स्वाध्याय | Q १ | पृष्ठ १२
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