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शीत क्षेत्रों के प्राणी एवं ठंडे जल में रहने वाली मछलियों में उपत्वकीय वसा की अधिक मोटी परत पाई जाती है। क्यों? वर्णन कीजिए। - Science (विज्ञान)

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प्रश्न

शीत क्षेत्रों के प्राणी एवं ठंडे जल में रहने वाली मछलियों में उपत्वकीय वसा की अधिक मोटी परत पाई जाती है। क्यों? वर्णन कीजिए। 

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

चमड़े के नीचे वसा परत को वसा ऊतक भी कहा जाता है जो त्वचा की सतह के नीचे मौजूद वसा जमा की परत को संदर्भित करता है। वसा की यह परत शरीर से अधिक गर्मी के नुकसान को कम करके संवाहक के रूप में कार्य करती है। ठन्डे क्षेत्र में जानवरों को अतिशीत जलवायु का सामना करना पड़ता है जहां गर्म जलवायु क्षेत्र की तुलना में अधिक दर पर शरीर से गर्मी (ऊर्जा ) का नुकसान होता है । इसलिए, उनके पास चमड़े के नीचे वसा की मोटी परत होती है जो संवाहक के रूप में कार्य करती है और अतिरिक्त गर्मी (ऊर्जा ) के नुकसान को कम करके और जीवों को गर्म रखकर जानवरों और मछलियों को ठंड से बचाती है। यह समीकरण है कि,मोटी वसा परत द्वारा जीवों से गर्मी(ऊर्जा ) की खपत कम होती है ।

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स्थायी ऊतक - जटिल स्थायी ऊतक: जलवाहिनी (जाइलम)
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अध्याय 6: ऊतक - प्रश्नावली [पृष्ठ ४५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी एक्झांप्लर Science [Hindi] Class 9
अध्याय 6 ऊतक
प्रश्नावली | Q 34. | पृष्ठ ४५
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