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प्रश्न
“श्वसनीय पथ एक ऐंफीबोलिक पथ होता है।” इसकी चर्चा करें।
संक्षेप में उत्तर
उत्तर
- श्वसन क्रिया के लिए ग्लूकोस एक सामान्य क्रियाधार है। इसे कोशिकीय ईंधन भी कहते हैं। कार्बोहाइड्रेट्स श्वसन क्रिया में प्रयोग किए जाने से पूर्व ग्लूकोस में बदल दिए जाते हैं। अन्य क्रियाधार श्वसन पथ में प्रयुक्त होने से पूर्व विघटित होकर ऐसे पदार्थों में बदले जाते हैं, जिनका उपयोग किया जा सके; जैसे-वसा पहले ग्लिसरॉल तथा वसीय अम्ल में विघटित होती है।
- वसीय अम्ल ऐसीटाइल को एन्जाइम बनकर श्वसन मार्ग में प्रवेश करता है। ग्लिसरॉल फॉस्फोग्लिसरेल्डिहाइड में बदलकर श्वसन मार्ग में प्रवेश करता है। प्रोटीन्स विघटित होकर ऐमीनो अम्ल बनाती है। ऐमीनो अम्ल विऐमीनीकरण के पश्चात् क्रेब्स चक्र के विभिन्न चरणों में प्रवेश करता है।
- क्रेब्स चक्र में उपयोगी होने के अलावा, एसिटाइल सीओए एक कच्चा माल है जिसका उपयोग फैटी एसिड, स्टेरॉयड, टेरपेन, सुगंधित रसायन और कैरोटीनॉयड को संश्लेषित करने के लिए किया जाता है। केटोग्लूटारेट नामक कार्बनिक अम्ल को संशोधन के दौरान ग्लूटामेट, एक महत्वपूर्ण अमीनो एसिड में परिवर्तित किया जाता है।
- इसी प्रकार जब वसा अम्ल का संश्लेषण होता है तो श्वसन मार्ग से ऐसीटाइल कोएन्जाइम अलग हो जाता है। अतः वसा अम्ल के संश्लेषण और विखण्डन के दौरान श्वसनीय मार्ग का उपयोग होता है।
- इसी प्रकार प्रोटीन के संश्लेषण व विखण्डन के दौरान भी श्वसनीय मार्ग का उपयोग होता है। इस प्रकार श्वसनी पथ में अपचय तथा उपचय दोनों क्रियाएँ होती हैं। इसी कारण श्वसनी मार्ग (पथ) को ऐम्फीबोलिक पथ कहना अधिक उपयुक्त है न कि अपचय पथ।
श्वसन मध्यस्थता के दौरान विभिन्न कार्बनिक अणुओं का व जल में विखंडन को दर्शाने वाला उपापचय पाथक्रम के आपसी संबंध का प्रदर्शन
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ऐंफीबोलिक पथ
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