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प्रश्न
संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए:
भारत के पर्णपाती वन
उत्तर
भारत के पर्णपाती वन मुख्यतः देश के मध्य और उत्तरी भागों में पाए जाते हैं। ये वन क्षेत्र जहां गर्मी के मौसम में अधिकतम वर्षा होती है और सर्दियों में कम वर्षा होती है, वहां विकसित होते हैं। पर्णपाती वनों की विशेषता यह है कि इनके पेड़ गर्मी के मौसम में अपने पत्ते गिरा देते हैं ताकि पानी की कमी से बच सकें। ये वन साल के एक निश्चित समय पर हरे-भरे होते हैं और बाकी समय पत्ते रहित हो जाते हैं।
भारतीय पर्णपाती वनों में मुख्य रूप से सागौन, साल, शीशम, और महुआ जैसे पेड़ पाए जाते हैं। ये वन विभिन्न प्रकार के जीव-जंतुओं के लिए आवास स्थली भी प्रदान करते हैं। इन वनों की उपजाऊ मिट्टी और उचित जलवायु कृषि और वन्यजीवन के लिए अनुकूल होती है।
पर्णपाती वनों का महत्व न केवल जैव विविधता के संरक्षण में है, बल्कि ये लकड़ी, औषधियां, और अन्य वन उत्पादों के महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं। हालांकि, अत्यधिक वनोन्मूलन और मानवीय हस्तक्षेप के कारण इन वनों को खतरा है। इसलिए, इनका संरक्षण और सतत प्रबंधन आवश्यक है।
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भारत के संदर्भ में -
भारतीय वनस्पतियाँ -
जोड़ियाँ मिलाइएँ:
अ गट | ब गट |
(अ) सदाबहार वन | (i) सुंदरी |
(आ) पर्णपाती वन | (ii) देवदार |
(इ) तटीय वन | (iii) पाऊ ब्रासील |
(ई) हिमालयीन वन | (iv) खेजड़ी |
(उ) कँटीली झाड़ियों वाले वन | (v) सागौन |
(vi) ऑर्किड | |
(vii) साल |
भारत का अधिकांश भाग पर्णपाती वनों से क्यों आच्छादित है?
भौगोलिक कारण लिखिए।
हिमालय के ऊँचे भागों में वनस्पतियों की संख्या विरल है।
निम्नलिखित के भौगोलिक कारण लिखिए :
भारत में पतझड़ के वन पाए जाते हैं।