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प्रश्न
संस्कृत भाषा में मेघदूत के अनुकरण पर कैसे काव्यों की परम्परा चल पड़ी? उनमें से तीन के नाम लिखिए
उत्तर १
मेघदूत के आधार पर संस्कृत में दृत-काव्यों की परम्परा चल 'पड़ी। विभिन्न कवियों ने विभिन्न शताब्दियों में अनेक संदेश-काव्य लिखे, जैसे--- जम्बू कवि का चन्द्रदूत, धोयी कवि का पवनदूत, वेंकटनाथ, रूपगोस्वामी, वामनभट्ट बाण के पृथक्-पृथक हंसदूत इत्यादि। शताधिक दूतकाव्य मेघदूत के अनुकरण पर लिखे गए हैं।
उत्तर २
मेघदूत के आधार पर संस्कृत में दृत-काव्यों की परम्परा चल 'पड़ी। विभिन्न कवियों ने विभिन्न शताब्दियों में अनेक संदेश-काव्य लिखे, जैसे--- जम्बू कवि का चन्द्रदूत, धोयी कवि का पवनदूत, वेंकटनाथ, रूपगोस्वामी, वामनभट्ट बाण के पृथक्-पृथक हंसदूत इत्यादि। शताधिक दूतकाव्य मेघदूत के अनुकरण पर लिखे गए हैं।
उत्तर ३
मेघदूत के आधार पर संस्कृत में दृत-काव्यों की परम्परा चल 'पड़ी। विभिन्न कवियों ने विभिन्न शताब्दियों में अनेक संदेश-काव्य लिखे, जैसे--- जम्बू कवि का चन्द्रदूत, धोयी कवि का पवनदूत, वेंकटनाथ, रूपगोस्वामी, वामनभट्ट बाण के पृथक्-पृथक हंसदूत इत्यादि। शताधिक दूतकाव्य मेघदूत के अनुकरण पर लिखे गए हैं।
उत्तर ४
मेघदूत के आधार पर संस्कृत में दृत-काव्यों की परम्परा चल 'पड़ी। विभिन्न कवियों ने विभिन्न शताब्दियों में अनेक संदेश-काव्य लिखे, जैसे--- जम्बू कवि का चन्द्रदूत, धोयी कवि का पवनदूत, वेंकटनाथ, रूपगोस्वामी, वामनभट्ट बाण के पृथक्-पृथक हंसदूत इत्यादि। शताधिक दूतकाव्य मेघदूत के अनुकरण पर लिखे गए हैं।