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प्रश्न
संवेदी, अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक स्मृति तंत्र से सुचना का प्रकरण किस प्रकार होता है ?
दीर्घउत्तर
उत्तर
अवस्था मॉडल के अनुसार स्मृति तंत्र तीन प्रकार के होते हैं:
संवेदी स्मृति, अल्पकालिक स्मृति तथा दीर्घकालिक स्मृति।
- संवेदी स्मृति : कोई भी नयी सूचना पहले संवेदी स्मृति में आती है। संवेदी स्मृति को संचयी क्षमता तो बहुत होती है किंतु इसकी अवधि बहुत कम होती है, एक सेकंड से भी कम। यह एक ऐसा स्मृति तंत्र है जो प्रत्येक संवेदना को परिशुद्धता से ग्रहण करता है। अक्सर इस तंत्र को संवेदी स्मृति या संवेदी पंजिका कहते है, क्योंकि समस्त संवेदनाएँ यहाँ उद्दीपक की प्रतिकृति के रूप में ही संग्रहित की जाती है।
- अल्पकालिक स्मृति : जिन सूचनाओं पर हम ध्यान देते हैं वे हमारी द्वितीय स्मृति भंडार में प्रवेश करती हैं। जिसे अल्पकालिक स्मृति कहा जाता है। जो थोड़ी सूचना को थोड़े समय तक (मान्यता 30 सेकंड या उससे कम) ही रख पाती हैं। एटकिंसन एवं शिफ्ररीन के अनुसार अल्पकालिक स्मृति में सूचना का कूट संकेतन मुख्य रूप से ध्वन्यात्मक होता हैं। यदि इसका निरंतर अभ्यास न किया जाए तो 30 सेकंड से कम समय में ही अल्पकालिक स्मृति से बाहर चली जाती है। ध्यान दीजिए की अल्पकालिक स्मृति कमजोर तो होती है लेकिन संवेदी पंजिका की भाँति नहीं, जहाँ एक सेकंड से भी कम समय में सूचना का क्षय हो जाता हैं।
- दीर्घकालिक स्मृति : ऐसी सामग्री, जो अल्पकालिक स्मृति की क्षमता एवं धारण अवधि की सीमाओँ को पार कर जाती है, यह दीर्घकालिक स्मृति में प्रवेश करती है जिसकी क्षमता व्यापक है। यह स्मृति का ऐसा स्थायी भंडार है जहाँ सूचनाएँ, चाहे वह कितनी भी नयी क्यों न हो। जैसे आपने कल क्या नास्ता किया था? से लेकर इतनी पुरानी, जैसे आपने अपना छठा जन्मदिन कैसे मनाया था ? सभी संचित होती हैं। यह प्रदर्शित किया गया है कि कोई बना एक बार दीर्घकालिक स्मृति के भंडार में चली जाती है तो उसे हम कभी नहीं भूलते क्योंकि यह शब्दार्थ कूट संकेतन में अर्थात किसी सूचना का क्या अर्थ है? द्वारा संग्रहित की जाती है।
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स्मृति तंत्र: संवेदी, अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक स्मृतियाँ
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