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प्रश्न
स्थानापन्न मातृत्व, काँचनलिका द्वारा फलन, वीर्य बैंक, आदि आधुनिक तकनीक मनुष्य के लिए उपयुक्त साबित होंगी। इस कथन का समर्थन कीजिए।
उत्तर
- कई दंपतियों को विभिन्न कारणों से संतान नहीं हो पाती। इसका कारण माता या पिता के शरीर में या प्रजननक्षमता में कोई दोष हो सकता है। ऐसी स्थिति में स्थानापन्न मातृत्व (सेरोगेट मदर), परखनली शीशु (IVF) वीर्य बैंक जैसी अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाता है।
- स्त्रियों में मासिक धर्म में अनियमितता, डिंब के निर्माण में रुकावट, अंडनलिका में डिंब के प्रवेश के लिए रुकावट, गर्भाशय के गर्भ आरोपण की क्षमता में कमी की समस्या होने से उन्हें संतान की प्राप्ती नहीं हो पाती।
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पुरुषों के वीर्य में शुक्राणु का पूर्णरूप से अभाव, शुक्राणुओं की मंद गति, शुक्राणुओं में विभिन्न दोष होने के कारण पुरुषों को संतान प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न होती है। इससे परुषों में नपंसकता भी आ सकती है। परंतु आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के कारण इन सभी समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। अत: IVF (परखनली शिशु), स्थापन्न मातृत्त्व, वीर्य बैंक इत्यादि तकनीकी की सहायता से संतानहीन दंपती को संतान प्राप्ति हो सकती है।
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स्थानापन्न मातृत्व: जिन स्त्रियों के गर्भाशय में आरोपण क्षमता नहीं होती है, ऐसी स्त्रियाँ स्थानापन्न मातृत्व पद्धति का उपयोग कर सकती हैं। इस पद्धति में जिन स्त्रियों के गर्भाशय में आरोपण क्षमता नहीं होती है, ऐसी स्त्रियों के अंडाशय से डिंब लिया जाता है। उस डिंब को परखनली (काँचनलिका) में लेकर उसी स्त्री के पति के शुक्राणु का उपयोग कर निषेचन (फलन) की क्रिया संपन्न की जाती है। इससे निर्मित होने वाले भ्रूण को किसी अन्य स्त्री के गर्भाशय में आरोपित किया जाता है। जिस स्त्री के गर्भाशय में भ्रूण का आरोपण किया जाता है, उस स्त्री को स्थापन्न माता कहते है।
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काँचनलिकामेंफलन (IVF) (परखनली शिशु): इस तकनीक में एक परखनली (काँचनलिका) में डिंब और शुक्राणु में निषेचन (फलन) कराया जाता है। इस निषेचन से निर्मित भ्रूण को दंपती की स्त्री के गर्भाशय में आरोपित किया जाता है। शुक्राणुओं की संख्या में कमी, डिंब का अंडनलिका के प्रवेश में रुकावट, इत्यादि समस्याओं के कारण यदि संतान की प्राप्ती न हो रही हो तो IVF तकनीक एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
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वीर्यबैंक: यदि पुरुष में शुक्राणुओं का निर्माण न हो रहा हो या उसके वीर्य में शुक्राणुओं की उचित मात्रा न हो तो ऐसे दंपती वीर्य बैंक का उपयोग करके संतान प्राप्त कर सकते हैं। वीर्य बैंक में उन्हीं पुरुषों का वीर्य संग्रहित किया जाता है जिनकी संपूर्ण शारीरिक तथा अन्य आवश्यक जाँच की गई हो। अतः इस वीर्य बैंक के वीर्य का उपयोग करके IVF तकनीक की सहायता से भ्रूण का निर्माण करके संतान प्राप्त की जा सकती है।