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प्रश्न
सूचना:– आवश्यकतानुसार परिच्छेद में लेखन अपेक्षित है।
सूचनाओंके अनुसार लेखन कीजिए: (05)
1. पत्रलेखन:
निम्नलिखित जानकारी के आधार पर पत्रलेखन कीजिए:
राधेय/राधा चौगुले, रामेश्वरनगर, वर्धा से दोहा प्रतियोगिता में प्रथम क्रमांक प्राप्त करने के कारण अभिनंदन करते हुए अपने मित्र/सहेली किशोर/किशोरी पाटील, स्टेशन रोड, जालना को पत्र लिखता/लिखती है।
अथवा
अशोक/आशा मगदुम, लक्ष्मीनगर, नागपुर से व्यवस्थापक, कौस्तुभ पुस्तक भंडार, सदर बाजार, नागपुर को प्राप्त पुस्तकों संबंधी शिकायत करते हुए पत्र लिखता/लिखती है।
2. निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों: (04)
स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओंमें कुछ लोग यह कहते मिलेंगे – जब तक विज्ञान और तकनीकी ग्रंथ हिंदी में न हो तब तक कैसे हिंदी में शिक्षा दी जाए। जब कि स्वामी श्रद्धानंद स्वाधीनता से भी चालीस साल पहले गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे। ग्रंथ भी हिंदी में थे और पढ़ाने वाले भी हिंदी के थे। जहाँ चाह होती है वहीं राह निकलती है। एक लंबे अरसे तक अंग्रेज गुरुकुल काँगड़ी को भी राष्ट्रीय आंदोलन का अभिन्न अंग मानते रहे। इसमें कोई संदेह भी नहीं कि गुरुकुल के स्नातकों में स्वाधीनता की अजीब तड़प थी। स्वामी श्रद्धानंद जैसा राष्ट्रीय नेता जिस गुरुकुल का संस्थापक हो और हिंदी शिक्षा का माध्यम हो; वहीं राष्ट्रीयता नहीं पनपेगी तो कहाँ पनपेगी। स्वामी जी से मिलने देश के प्रमुख राष्ट्रीय नेता भी गुरुकुल आते रहते थे।
उत्तर
1. दिनांक: १ अक्टूबर, २०२०
किशोर पाटील,
स्टेशन रोड,
जालना।
[email protected]
प्रिय किशोर,
हस्तमिलन।
मैं स्वस्थ व सकुशल हूँ और आशा करता हूँ कि आप भी प्रसन्न व कुशल होंगे। दो दिन पूर्व ही आपका पत्र प्राप्त हुआ। यह जानकर गर्व से सीना फूल गया कि आपने दोहा प्रतियोगिता में प्रथम क्रमांक प्राप्त किया है। इस उपलब्धि से आपने न केवल अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है, बल्कि अपने परिवार व विद्यालय का भी नाम रोशन कर दिया है। आज मुझे आपका मित्र होने पर सचमुच बहुत गर्व हो रहा है। आप इसी तरह सदैव प्रगति के पथ पर गतिमान रहो व सफलता के नित नए आयाम छुओ। मेरी शुभकामनाएँ प्रतिपल आपके साथ हैं। चाचा जी और चाची जी को मेरा प्रणाम और साक्षी को सनेह प्यार कहना।
आपका प्रिय मित्र,
राधेय
राधेय चौगुले,
रामेशवर नगर,
वर्धा।
[email protected]
अथवा
दिनांक: ४ अक्टूबर, २०२०
प्रति,
माननीय व्यवस्थापक जी,
कौस्तुभ पुस्तक भंडार,
सदर बाजार,
नागपुर।
[email protected]
विषय: प्राप्त पुस्तकों के संबंध में।
महोदय,
आपके दवारा भेजा हुआ पुस्तकों का पार्सल मुझे आज ही प्राप्त हुआ।
आपको यह सूचित करते हुए मुझे खेद हो रहा है कि आपके द्वारा भेजी गई पुस्तकों में से कुछ पुस्तकें फटी हुई हैं और कुछ पुरानी हैं। 'चित्रलेखा' और 'रामचरितमानस' की किताबों का तो बुरा हाल है। 'निबंध पुष्पमाला' किताब का कवर फटा हुआ है और 'निबंध सुषमा' किताब के कई पनने गायब हैं, इसीलिए इन पुस्तकों को मैं आज ही पोस्ट-पार्सल से लौटा रहा हूँ। साथ में बिल की ज़ेरॉक्स कॉपी भी भेज रहा हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस विषय में आप स्वयं ध्यान देंगे और नई पुस्तकें भिजवाने की शीघ्र व्यवस्था करेंगे। धन्यवाद!
भवदीय,
अशोक
अशोक मगदुम,
लक्ष्मीनगर,
नागपुर।
[email protected]
2.
- कौन हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे?
- कहाँ राह निकलती है?
- लंबे अरसे तक अंग्रेज किसे राष्ट्रीय आंदोलन का अभिनन अंग मानते रहे?
- स्वामी जी से मिलने देश के प्रमुख राष्ट्रीय नेता कहाँ आते रहते थे?