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सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: निर्मल तेरा नीर अमृत के सम उत्तम है, शीतल-मंद-सुगंध पवन हर लेता श्रम है। षड्ऋतुओं का विविध दृश्ययुत अद्भुत क्रम है, हरियाली का फर्श नहीं मखमल से कम है। - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गयी सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

निर्मल तेरा नीर अमृत के सम उत्तम है,
शीतल-मंद-सुगंध पवन हर लेता श्रम है।
षड्ऋतुओं का विविध दृश्ययुत अद्भुत क्रम है,
हरियाली का फर्श नहीं मखमल से कम है।

शुचि सुधा सींचता रात में, तुझपर चंद्र प्रकाश है।
हे मातृभूमि! दिन में तरणि, करता तम का नाश है।।

  1. उचित जोड़ियाँ लगाइए:     [2]
    'अ' उत्तर 'ब'
    (i) निर्मल ______ दृश्य 
    (ii) शीतल ______ मखमल
    (iii) षडऋतु ______ पवन
    (iv) हरियाली ______ नीर
  2. प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   [2]
आकलन

उत्तर

  1. 'अ' उत्तर 'ब'
    (i) निर्मल नीर दृश्य
    (ii) शीतल पवन मखमल
    (iii) षडऋतु दृश्य पवन
    (iv) हरियाली मखमल नीर
  2. प्रस्तुत पंक्तियाँ मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कविता 'मातृभूमि' से ली गई हैं। मातृभूमि पर उपलब्ध प्राकृतिक स्रोतों से तो जल मिल रहा है। वह अमृत के समान उत्तम है। इस मातृभूमि पर बहने वाली शीतल-मंद व सुंगधित पवन मनुष्य के सारे कष्टों को दूर भगाती है। वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत व शिशिर इन छ: ऋतुओं के एक के बाद एक अदभुत दृश्य देखने को मिलते हैं। मातृभूमि का धरातल हरियाली से भरा हुआ है; जो किसी रोएँदार मखमल के कपड़े से कम नहीं है।
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मातृभूमि
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संबंधित प्रश्न

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

सुरभित, सुंदर, सुखद सुमन तुझपर खिलते हैं,
भाँति-भाँति के सरस, सुधोपन फल मिलते हैं।
औषधियाँ हैं प्राप्त एक-से-एक निराली,
खानें शोभित कहीं धातु वर रत्नोंवाली।

जो आवश्यक होते हमें, मिलते सभी पदार्थ हैं।
हे मातृभूमि वसुधा-धरा, तेरे नाम यथार्थ हैं।।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए:  (2)

(2) अन्तिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)


निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

नीलांबर परिधान हरित पट पर सुंदर है,
सूर्य-चन्द्र युग मुकुट, मेख्बला रत्नाकर है।
नदियाँ प्रेम प्रवाह, फूल तारे मंडल हैं;
बंदीजन ,खग बूंद, शेष फ़न सिंहासन है।
करते अभिषेक पैयोद हैं; बलिंहारी इस देश की।
हे मातृभूमि, तू सत्य ही, सगुण मूर्ति सर्वेश की ॥
निर्मल तेरा नीर अमृत के सम उत्तम है,
शीतल मंद-सुगंध पवन हर लेता श्रम है।

(1) उचित जोड़ियाँ मिलाइये-   (2)

नीलांबर प्रेम प्रवाह
सूर्य-चन्द्र सुंदर
नदियाँ रत्नाकर
निर्मल अमृत

(2) पहली दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)


कृति पूर्ण कीजिए:


कृति पूर्ण कीजिए:


कृति पूर्ण कीजिए:


इन शब्द-शब्‍द समूहों के लिए कविता में प्रयुक्‍त शब्‍द लिखिए:

शब्द/शब्द समूह शब्द
पक्षियों के समूह ______
शेषनाग के फन ______
समुद्र ______
सूरज और चाँद ______

संजाल पूर्ण कीजिए:


एक शब्‍द के लिए शब्‍द समूह लिखिए:

विश्वपालिनी = ______


एक शब्‍द के लिए शब्‍द समूह लिखिए:

भयनिवारिणी = ______


चौखट में प्रयुक्‍त शब्‍द को सूचना के अनुसार परिवर्तन करके लिखिए:

विलोम शब्द शब्द पर्यायवाची शब्द
______ सत्‍य ______

चौखट में प्रयुक्‍त शब्‍द को सूचना के अनुसार परिवर्तन करके लिखिए:

विलोम शब्द शब्द पर्यायवाची शब्द
______ शीतल ______

चौखट में प्रयुक्‍त शब्‍द को सूचना के अनुसार परिवर्तन करके लिखिए:

विलोम शब्द शब्द पर्यायवाची शब्द
______ रात ______

चौखट में प्रयुक्‍त शब्‍द को सूचना के अनुसार परिवर्तन करके लिखिए:

विलोम शब्द शब्द पर्यायवाची शब्द
______ निर्मल ______

‘हे शरणदायिनी देवी तू, करती सबका त्राण है’ पंक्‍ति से प्रकट होने वाला भाव लिखिए।


निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

क्षमामयी, तू दयामयी है, क्षेममयी है,
सुधामयी, वात्सल्यमयी, तू प्रेममयी है।
विभवशालिनी, विश्वपालिनी, दुखहर्ती है,
भयनिवारिणी, शांतिकारिणी, सुखकर्ती है।
हे शरणदायिनी देवी तू, करती सबका त्राण है।
हे मातृभूमि संतान हम, तू जननी, तू प्राण है।।

  1. कृति पूर्ण कीजिए:       [2]
    जन्मभूमि की विशेषताएँ:
    1. ____________
    2. ____________
    3. ____________
    4. ____________
    5. ____________
  2. पद्यांश की किन्हीं चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   [2]

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