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प्रश्न
सुदर्शन जी का मूल नाम लिखिए।
निम्नलिखित प्रश्न का मात्र एक वाक्य में उत्तर लिखिए:
सुदर्शन जी का मूल नाम लिखिए।
उत्तर
सुदर्शन जी का मूल नाम ‘बदरीनाथ’ है।
संबंधित प्रश्न
कृति पूर्ण कीजिए :
साधुओं की एक स्वाभाविक विशेषता - ____________
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आगरा शहर का प्रभातकालीन वातावरण - ____________
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साधुओं की मंडली आगरा शहर में यह गीत गा रही थी - ____________
‘मनुष्य जीवन में अहिंसा का महत्त्व’, इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
‘सच्चा कलाकार वह होता हैजो दूसरों की कला का सम्मान करता है’, इस कथन पर अपना मत व्यक्त कीजिए ।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग ८० से १०० शब्दों में लिखिए।
‘आदर्श बदला’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग ८० से १०० शब्दों में लिखिए:
‘बैजू बावरा संगीत का सच्चा पुजारी है’, इस विचार को स्पष्ट कीजिए।
सुदर्शन जी का मूल नाम: ____________
निम्नलिखित प्रश्न का मात्र एक वाक्य में उत्तर लिखिए:
सुदर्शन ने इस लेखक की लेखन परंपरा को आगे बढ़ाया है।
निम्नलिखित पठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
ऊपर की घटना को बारह बरस बीत गए। जगत में बहुत-से परिवर्तन हो गए। कई बस्तियाँ उजड़ गईं। कई वन बस गए। बूढ़े मर गए। जो जवान थे; उनके बाल सफेद हों गए। अब बैजू बावरा जवान था और रागविद्या में दिन-ब-दिन आगे बढ़ रहा था। उसके स्वर में जादू था और तान में एक आश्चर्यमयी मोहिनी थी। गाता था तो पत्थर तक पिघल जाते थे और पशु-पंछी तक मुग्ध हो जाते थे। लोग सुनते थे और झुमते थे तथा वाह-वाह करते थे। हवा रुक जाती थी। एक समाँ बँध जाता था। एक दिन हरिदास ने हँसकर कहा - "वत्स ! मेरे पास जो कुछ था, वह मैंने तुझे दे डाला। अब तू पूर्ण गंधर्व हो गया हैं। अब मेरे पास और 'कुछ नहीं, जो तुझे दूँ।'' बैजू हाथ बाँधकर खड़ा हो गया। कृतज्ञता का भाव आँसुओं के रूप में बह निकला। चरणों पर सिर रखकर बोला - 'महाराज ! आपका उपकार जन्म भर सिर सें न उतरेगा। हरिदास सिर हिलाकर बोले - "यह नहीं बेटा ! कुछ और कहो। मैं तुम्हारे मुँह से कुछ और सुनना चाहता हूँ।' बैजू ने बिना सोच-विचार किए कह दिया - ‘‘मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि.....’’ हरिदास ने वाक्य को पूरा किया - ‘‘इस रागविद्या से किसी को हानि न पहुँचाऊँगा।’’ बैजू का लहू सूख गया। उसके पैर लड़खड़ाने लगे। सफलता के बाग परे भागते हुए दिखाई दिए। बारह वर्ष की तपस्या पर एक क्षण में पानी फिर गया। प्रतिहिंसा की छुरी हाथ आई तो गुरु ने प्रतिज्ञा लेकर कुंद कर दी। बैजू ने होंठ काटे, दाँत पीसे और रक्त का घूँट पीकर रह गया। मगर गुरु के सामने उसके मुँह से एक शब्द भी न निकला। गुरु गुरु था, शिष्य शिष्य था। शिष्य गुरु से विवाद नहीं करता। |
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (2)
जवान बैजू के संगीत की क्या विशेषताएँ थी ?
2. निम्नलिखित शब्दों के विरुद्धार्थी शब्द लिखिए: (2)
- कृतज्ञता - ______
- उजड़ना - ______
- उपकार - ______
- जवान - ______
3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए: (2)
कृतज्ञता मनुष्य का उत्तम गुण है इस विषय पर अपना मत लिखिए।