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स्वांतः सुखाय तुलसी रघुनाथ गाथा। - Marathi (Second Language) [मराठी (द्वितीय भाषा)]

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प्रश्न

स्वांतः सुखाय तुलसी रघुनाथ गाथा।

लघु उत्तरीय

उत्तर

गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना किसी प्रसिद्धि या लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने आत्मिक सुख और भगवान श्रीराम की भक्ति के लिए की थी। यह पंक्ति सिखाती है कि सच्ची रचनात्मकता और कार्य तभी श्रेष्ठ होते हैं जब वे आत्मिक संतोष और निष्ठा से किए जाएँ, न कि बाहरी प्रशंसा के लिए। हमें भी अपने कार्य निष्काम भाव और समर्पण से करने चाहिए, क्योंकि सच्चा सुख आंतरिक संतोष में ही निहित होता है।

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अध्याय 1.2: एक सैर ऐसी भी - अंतःपाठ प्रश्न [पृष्ठ ७]

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बालभारती Integrated 7 Standard Part 2 [Hindi Medium] Maharashtra State Board
अध्याय 1.2 एक सैर ऐसी भी
अंतःपाठ प्रश्न | Q ६. | पृष्ठ ७
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