Advertisements
Advertisements
प्रश्न
‘तोड़ो’ कविता नवसृजन की प्रेरणा है। कथन के आलोक में अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर
- कवि विध्वंसकारी भूमिका में न होकर सृजन के लिए उपयुक्त भूमि तैयार करने की प्रेरणा देना।
- चट्टानों और ऊसर भूमि को तोड़ने की बात ताकि सृजन प्रक्रिया शुरू की जा सके।
- प्रकृति से मानव मन की तुलना करके नया आयाम प्रस्तुत करना।
- मन में समाई ऊब और खीझ को तोड़ना आवश्यक है जिसके बिना मनुष्य अपना विकास नहीं कर सकता।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
'पत्थर' और 'चट्टान' शब्द किसके प्रतीक हैं?
भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को
हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीज को?
गोड़ो गोड़ो गोड़ो
कविता का आरंभ 'तोड़ो तोड़ो तोड़ो' से हुआ है और अंत 'गोड़ो गोड़ो गोड़ो' से। विचार कीजिए कि कवि ने ऐसा क्यों किया?
ये झूठे बंधन टूटें
तो धरती को हम जानें
यहाँ पर झूठे बंधनों और धरती को जानने से क्या अभिप्राय हैं?
'आधे-आधे गाने' के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
मिट्टी और बीज से संबंधित और भी कविताएँ हैं, जैसे सुमित्रानंदन पंत की 'बीज'। अन्य कवियों की ऐसी कविताओं का संकलन कीजिए और भित्ति पत्रिका में उनका उपयोग कीजिए।
निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -
ये पत्थर ये चट्टानें तोड़ो तोड़ो तोड़ो |