Advertisements
Advertisements
प्रश्न
टॉर्च बेचने वाले किस प्रकार की स्किल प्रयोग करते हैं? इसका 'स्किल इंडिया’ प्रोग्राम से कोई संबंध है?
उत्तर
टॉर्च बेचने वाले कई प्रकार की स्किल का प्रयोग करते हैं जो निम्नलिखित है:
- बोलने का तरीका
- ग्राहकों को आकर्षित करने का तरीका
- ग्राहक को हर तरह के फायदे बताना
- अपने सामान का प्रचार करना
मेरे अनुसार इसका स्किल इंडिया प्रोग्राम से कोई संबंध नहीं है। यह कला खुद की होती है या खुद में इसको लाया जाता है कि किस तरह अपना सामान लोगों तक पहुंचाएं। बेचने वाला तरह-तरह के प्रचार प्रसार करता है जिससे खरीदने वाला आकर्षित हो जाता है और सामान खरीदना है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
लेखक ने टार्च बेचनेवाली कंपनी का नाम 'सूरज छाप' ही क्यों रखा?
पाँच साल बाद दोनों दोस्तों की मुलाकात किन परिस्थितियों में और कहाँ होती है?
पहला दोस्त मंच पर किस रूप में था और वह किस अँधेरे को दूर करने के लिए टार्च बेच रहा था?
भव्य पुरुष ने कहा - 'जहाँ अंधकार है वहीं प्रकाश है।' इसका क्या तात्पर्य है?
भीतर के अँधेरे की टार्च बेचने और 'सूरज छाप' टार्च बेचने के धंधे में क्या फ़र्क है? पाठ के आधार पर बताइए।
'सवाल के पाँव ज़मीन में गहरे गड़े हैं। यह उखड़ेगा नहीं।' इस कथन में मनुष्य की किस प्रवृत्ति की ओर संकेत है और क्यों?
'व्यंग्य विधा में भाषा सबसे धारदार है।' परसाई जी की इस रचना को आधार बनाकर इस कथन के पक्ष में अपने विचार प्रकट कीजिए।
आशय स्पष्ट कीजिए -
क्या पैसा कमाने के लिए मनुष्य कुछ भी कर सकता है?
आशय स्पष्ट कीजिए -
प्रकाश बाहर नहीं है, उसे अंतर में खोजो। अंतर में बुझी उस ज्योति को जगाओ।
आशय स्पष्ट कीजिए -
धंधा वही करूँगा, यानी टार्च बेचूँगा। बस कंपनी बदल रहा हूँ।
लेखक ने ‘सूरज छाप’ टॉर्च को नदी में क्यों फेंक दिया? क्या आप भी वही करते?
'पैसा कमाने की लिप्सा ने आध्यामत्मिकता को भी एक व्यापार बना दिया है।' इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।
समाज में फैले अंधविश्वासों का उल्लेख करते हुए एक लेख लिखिए।
एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा हरिशंकर परसाई पर बनाई गई फ़िल्म देखिए।