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तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो - जेठू का यह कथन रचना संसार के किस सत्य को उद्घाटित करता है? - Hindi (Core)

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प्रश्न

तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो - जेठू का यह कथन रचना संसार के किस सत्य को उद्घाटित करता है?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

रचना संसार और इसमें रहने वाले लोगों की अपनी एक अलग ही जीवन-शैली है। ये लोग लेखन कार्य के लिए सारी सारी रात जाग सकते हैं, जागते हैं। तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो – जेठू का यह कथन बेबी को यही बात समझाने के लिए था। जेठू ने यह भी समझाया था कि आशापूर्णा देवी भी सारा काम-काज निबटाकर रात-रात भर चोरी-चोरी लिखती थी, जब लोग सो जाते थे। यह सच है रचना संसार में लेखन का एक नशा होता है, जैसा मुंशी प्रेमचंद को भी था, जो कई मील पैदल चलकर आते, खाने-पीने का ठिकाना न था, फिर भी डिबरी की रोशनी में कई-कई घंटे बैठकर लेखन कार्य करते थे। ऐसी ही बेबी हालदार ने भी किया। जब सारी झुग्गी बस्ती सो जाती तो वह लेखन कार्य करती रहती थी।

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आलो आंधारि
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अध्याय 3: आलो-आँधारि - अभ्यास [पृष्ठ ५८]

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एनसीईआरटी Hindi - Vitan Class 11
अध्याय 3 आलो-आँधारि
अभ्यास | Q 5. | पृष्ठ ५८

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